होली के रंग भाभी की गांड में लंड


(Holi Ke Rang Bhabhi Ki Gand Me Lund)

भाभी की गांड चुदाई की इस कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने एक पड़ोसन भाभी को होली वाले दिन चोदा.
अन्तर्वासना की सभी भाभियों को मेरे तने लंड का प्रणाम. मेरा नाम राहुल (बदला हुआ) है. मैं गुवाहाटी का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 26 साल की है. ऐसे तो मैंने काफी लड़कियों को चोदा है, पर ये कहानी इसी साल होली के समय की है. मेरे पड़ोस में एक भाभी अपने पति और एक बच्चे के साथ रहती हैं. भाभी दिखने में बहुत कयामत लगती हैं. एक बार उन्हें कोई देख ले तो लंड खड़ा जरूर हो जाए.
भाभी से मेरी मुलाकात होती रहती थी. भाभी और मैं एक दोस्त की तरह रहते थे.

तो दोस्तो हुआ यूं कि एक दिन भाभी ने मुझे फोन किया कि वो अपने पति के शराब पीने की आदत से काफी परेशान हैं, इसलिए उन्होंने अपने पति को थोड़े दिन के लिए उनके दोस्तों के साथ शिखरजी, जो कि राजस्थान में एक धार्मिक जगह है, वहां भेज दिया. भाभी ने सोचा था कि थोड़े दिन वहां रहेंगे, तो शराब की आदत छूट जाएगी.

इसी बीच मेरी उनसे फोन में रोजाना बात होने लगी. फिर एक दिन उन्होंने मुझे कहा कि कल होली है और इस बार उन्हें होली अकेली मनानी पड़ेगी … इसलिए वह उदास हैं.
मैंने कहा कि उदास होने की जरूरत नहीं है … इस बार होली अपने देवर के साथ मना लेना.

दूसरे दिन मैंने 11 बजे भांग पी और रंग लेकर भाभी घर पहुंच गया. भाभी मुझे देख कर खुश हो गईं. मैंने कहा- भाभी जी आपको रंग लगाने आया हूँ.
भाभी- रुको, पहले मैं कपड़े बदल लेती हूं.

यह कहकर भाभी अपने बेडरूम में चली गईं. थोड़ा सोचने के बाद मैं भी उनके रूम की ओर चल दिए. मैंने देखा भाभी पूरी नंगी थीं और अलमारी से कपड़े निकल रही थीं. मैं नशे में था और यह देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया. मैंने जल्दी से अपने हाथ में रंग लिया और जा कर पीछे से भाभी को पकड़ कर उनके गालों में रंग लगा दिया.

भाभी डर गईं क्योंकि यह सब अचानक से हुआ था. इसके बाद भाभी ने मुझे धक्का मारा और गुस्सा हो गईं तो मैंने उनसे माफी मांगी. लेकिन भाभी के गोल गोल बूब्स देख कर मेरी नियत फिर बिगड़ गयी.

इस बार मैंने भाभी को पकड़ कर किस करना शुरू कर दिया. पहले तो भाभी ने आना कानी की, लेकिन वो भी बहुत दिनों से लंड की भूखी थीं … इसलिए उन्होंने मेरा साथ देना उचित समझा. अब भाभी कपड़ों के ऊपर से मेरा लंड पकड़ कर कहने लगीं- राहुल, प्लीज आज मुझे अच्छे से रंग दो.
इतना सुनते ही मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला और उनके मुँह में डाल दिया, भाभी लंड को बेसब्री से अंदर बहार करके चूसने लगी. कुछ देर बाद मैंने भाभी को लिटाया और मैं उनकी चूत चाटने लग गया. उनकी चूत का पानी मुझे काफी स्वादिष्ट लगा. इसके बाद भाभी ने मुझे कहा- प्लीज राहुल और मत तड़पाओ. आज मेरी चूत को फाड़ दो.

इतना सुनते ही मैं भी जोश में आ गया और मैंने अपने कपड़े उतारे और अपने लंड को उनकी चूत में घुसा दिया. भाभी जोर जोर से चिल्लाने लगीं और मुझे मुझे गंदी गंदी गालियां देने लगीं. पर मैं कहां रुकने वाला था. मैंने बस उन्हें चोदे जा रहा था.
थोड़ी देर बाद मैंने उन्हें कुतिया बनने को कहा और वो झट से कुतिया की पोजीशन में आ गईं. मैं पीछे से उनकी चूत, जो थोड़ी चिकनी हो गयी थी, उसमें अपना लंड डाल दिया. मैं पूरे जोश में उन्हें चोद रहा था. उनके मुँह से सिसकारियां निकल रही थीं, जो मुझे और भी उत्तेजित कर रही थीं. बीस मिनट की घमसान चुदाई के बाद मैंने उनसे बिन पूछे अपना पूरा माल उनकी चूत में डाल दिया.

हम दोनों थक चुके थे, इसलिए हम वहीं बिस्तर में नंगे लेट गए. फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों उठ कर बाथरूम गए और अपने आप को साफ किया. फिर मैं वैसे ही नंगा बैठ कर टीवी देखने में लग गया और भाभी भी नंगी अवस्था में किचन में चली गईं. क्योंकि इतनी घमासान चुदाई के बाद भूख अच्छी लगती है.

भाभी की गांड का नजारा

कुछ ही देर में भाभी कॉफ़ी और कुछ नमकीन ले कर आईं. हम दोनों बैठ कर नाश्ता करने लगे. जब मैं कॉफ़ी पी रहा था तो मेरी नजर भाभी गांड की तरफ गयी, जो कि काफी उठी हुई है.

ऐसा लग रहा था जैसे भाभी की गांड मेरे लंड को निमंत्रण दे रही हो कि आओ मुझ में घुस जाओ.

मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा और मैंने भाभी की गांड को हल्के से दबा दी.
भाभी- यह क्या कर रहे हो?
मैं- भाभी मुझे आपकी गांड मारनी है.
भाभी- नहीं, मैंने सुना है गांड में बहुत ज्यादा दर्द होता है … इसलिए मैं गांड नहीं मरवा सकती.
मैं- प्लीज प्लीज भाभी गांड मारने दो ना. आपकी गांड में मैं धीरे धीरे लंड डालूंगा … अगर दर्द हुआ तो मुझे बता देना, मैं नहीं करूँगा.

पर भाभी नहीं मान रही थीं इसलिए मैंने थोड़ा और जोर दिया और थोड़ा उदास हो गया, जिससे भाभी मान गईं. उन्होंने कहा कि तेरी खुशी के लिए मान रही हूँ … लेकिन वादा कर कि अगर दर्द हुआ तो तू जबरदस्ती नहीं करेगा.
मुझे तो बस उनकी गांड चाहिए थी, इसलिए मैंने उन्हें वादा कर दिया. इसके बाद मैं उन्हें किस करने लगा, जिससे वो जल्दी गर्म हो जाए.

किस करते करते मैं उनकी चूत की तरफ आ गया और उनकी चूत में अपनी जीभ डालकर उनकी चूत से खेलने लग गया. अब तक वो भी गर्म हो गयी थीं, क्योंकि वो मुझसे कह रही थीं कि वो मेरा लंड चूसना चाहती हैं.

मैं झट से 69 की पोजीशन में आ गया. अब हम दोनों आराम से एक दूसरे को चाट रहे थे. उनके मुँह में मेरा हथियार और भी गर्म हो गया इसलिए मैंने देर न करते हुए उन्हें एक बार फिर से कुतिया बनाया और उनके पीछे आ गया.

मैंने पास ही रखी वैसलीन की डिब्बी उठाई और वैसलीन निकाल कर अपने लंड में अच्छे से लगा ली और भाभी की गांड में भी मैंने वैसलीन लगा दी, जिससे लंड घुसने में आसानी हो. भाभी की गांड कुंवारी थी और उसका छेद भी छोटा था.

अब मैं अपने लंड को उनकी गांड की लकीर पर टिका कर पेलने की तैयारी कर ही रहा था कि भाभी ने फिर से मुझे कहा- प्लीज धीरे डालना, मुझे डर लग रहा है.
मैं- टेंशन मत लो भाभी … आपको कोई तकलीफ नहीं होने दूँगा.
इतना कह कर मैं अपना लंड उनकी गांड में डालने की कोशिश करने लगा, पर हर बार मेरा लंड फिसल जाता रहा. इसलिए इस बार मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी गांड को थोड़ा चौड़ा किया और एक जोरदार झटका दे मारा, जिससे मेरा लंड आधे से ज्यादा उनकी गांड में घुस गया.

भाभी दर्द के मारे चिल्ला उठीं और उनकी आंखों में आंसू आ गए. साथ ही वो छटपटाने लगीं और अपनी गांड में से मेरे लंड को निकालने की कोशिश करने लगीं- मार डाला … प्लीज निकालो इसे … मुझे नहीं मरवानी अपनी गांड … फाड़ दिया मादरचोद ने मेरी गांड को.
पर मुझे तो जैसे भी भाभी की गांड को चोदना ही था, इसलिए मैंने कहा- बस एक बार दर्द होता है भाभी … अब नहीं होगा.
भाभी- बहन के लौड़े .. तूने कहा था कि जबरदस्ती नहीं करेगा … लेकिन तू मादरचोद निकला.

उनके इतना कहते ही मैंने उनसे बिना कुछ कहे एक और जानदार झटका मारा, जिससे मेरा लंड उनकी गांड में पूरा घुस गया. साथ ही मैंने उनको कस के पकड़ लिया और एक हाथ से उनके मुँह को दबा दिया, जिससे कारण वो छूट न सकें और चिल्ला न सकें. थोड़ी देर यूं ही उनकी गांड में लंड डाले पड़े रहा.

थोड़ी देर बाद जब मुझे लगा कि सब नार्मल है, तो मैंने धीरे से अपना हाथ उनके मुँह से हटाया और उन्हें सॉरी बोला. लेकिन अब वो खुद धीरे धीरे अपनी गांड को आगे पीछे करने लगीं, जिससे मैं समझ गया कि यह अब पूरी तरह तैयार हैं.

अब मैं भी धीरे अपने लंड को आगे पीछे करने लगा और उनकी गांड को चोदने लगा. उनकी गांड इतनी टाइट थी कि मेरे लंड में हल्का सा दर्द हो रहा था.
भाभी- बहनचोद, तूने मुझसे झूठा वादा करके मेरी गांड फाड़ दी.
मैं- क्या करूँ तू है ही इतनी मस्त माल रंडी.

अब तक मैं पूरे जोश में आ गया था और पूरी स्पीड में उन्हें चोद रहा था. भाभी जोर जोर से सिसकारियां भर रही थीं, जो कि इस चुदाई के कार्यक्रम को और भी मधुर बना रही थीं.

आखिरकार 15-20 झटके मारने के बाद मैंने अपना रस उनकी गांड में भर दिया और उनके ऊपर गिर गया. भाभी की आंख में आंसू थे, लेकिन खुशी भी थी. वो मेरे बालों को सहलाने लगीं, जिससे कुछ ही देर में मेरी आंख लग गयी. जब आंख खुली तो अंधेरा हो चुका था इसलिए मैं उठा और अपने कपड़े पहन कर उनको एक प्यार भरा किस दे कर अपने घर आ गया. इसके बाद आगे हमें जब भी मौका मिलता है, हम चुदाई जरूर कर लेते हैं.

अब तो भाभी ने मुझे प्रॉमिस किया है कि वो अपनी सहलियों की चूत भी मुझे दिलाएंगी.

तो दोस्तो, यह थी मेरी जीवन की पहली सेक्स स्टोरी. आशा करता हूँ कि आप सभी को यह सेक्स स्टोरी अच्छी लगी होगी.
भाभी की गांड चुदाई की इस कहानी पर आपके विचार जानने के लिए मुझे आपके मेल का इंतज़ार रहेगा.
आपका राहुल


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