देहरादून में मकान मालकिन की चुदाई


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(Dehradun Me Makan Malkin Ki Chudai)

दोस्तो, मैं आज आपके साथ अपनी पहली सच्ची स्टोरी शेयर करना चाहता हूँ. ये कहानी मैं पहली बार लिख रहा हूँ.. कोई गलती हो तो माफ़ कर देना. मैं काफी टाइम से अन्तर्वासना में आप सभी की सेक्स स्टोरी पढ़ रहा हूँ और आज मुझे लगा कि मैं भी आपके साथ अपनी स्टोरी शेयर करूँ.

मेरा नाम सुमित शर्मा है, मेरी लंबाई 6 फिट है. मुझे जिम जाने का शौकीन है.. जिस कारण मेरा शरीर काफी आकर्षक है. मैं बरेली में रहता हूँ.

मेरी एक गर्लफ्रेंड थी, जो बरेली में ही मेरे साथ रहती थी और वहीं पर जॉब करती थी. एक दिन उसका ट्रांसफर देहरादून हो गया और वो वहां चली गयी. मुझे कुछ दिनों तक उसके बिना बहुत बुरा लगा. फिर मैं भी कुछ दिनों बाद देहरादून निकल गया और उसके साथ रहने लगा.

वो दो मंजिला घर में ऊपर रहती थी और नीचे मकान मालकिन रहती थी. मैं मकान मालकिन को आंटी जी कहता था. उनको ये पता था कि हम दोनों भाई बहन हैं.

मैं जब देहरादून गया था तो मैंने वहां कोई जॉब नहीं की थी, तो मैं घर पर ही रहता था. इस कारण मेरी आंटी से दोस्ती कुछ ज्यादा ही हो गयी थी. वो मुझसे काफी ओपन हो गई थीं और अपनी हर बात मुझे बताने लगी थीं.

मैं आंटी के बारे में आपको बताता हूँ. आंटी एक 40 साल की भरी पूरी महिला थीं. उनके मम्मों की 38 साइज इंच थी.. उनके चूतड़ एकदम गोल और उठे हुए थे. आंटी देखने में एकदम मस्त माल थीं. वो चूंकि पहाड़ों वाले इलाके यानि नैनीताल के अल्मोड़ा की रहने वाली एक पहाड़न थीं तो आप खुद समझ सकते हैं कि तो कैसी होंगी.

जिस टाइम मेरी उनसे बात होती थी, उस टाइम वो आपने पति से बहुत दुखी थीं क्योंकि उनके पति का बाहर किसी और से चक्कर चलता था. उनके दो बच्चे थे, जो बाहर पढ़ते थे. उनका पति सुबह जाता था और रात को ही आता था, जिस कारण वो अपनी सारी बातें मुझे बता देती थीं.

एक बार मेरी गर्लफ्रेंड दो दिन के लिए ऑफिस के काम से बाहर चली गयी, जिस कारण मैं घर में अकेला था और टीवी में मूवी देख रहा था. तभी आंटी जी मेरे रूम में आईं और रोने लगीं.. वे अपने पति की बात बताने लगीं. मैं उनको दिलासा देने लगा.
मैंने आंटी से कहा- आप कितनी हॉट लगती हो.. तब भी अंकल बाहर मुँह मारते हैं.. अगर आप मेरी बीवी होतीं, तो मैं आपको छोड़ता ही नहीं.

आंटी शर्मा गईं और कहने लगीं कि झूठ मत बोलो.
मैंने कहा- सच में आंटी मैं गलत नहीं कह रहा हूँ. आप बहुत ही हॉट हो.
आंटी खुश होकर कहने लगीं- चल हट, मैं अब कहां से हॉट रह गई हूँ.

मैंने उनकी आँखों में देखा तो मुझे एक वासना सी दिखाई दे रही थी. मैंने समझ लिया कि शायद आज इनका चुदने का मन है, इसलिए ये मेरे पास आई हैं. तब भी मैं पूरी तरह से उनको समझ लेना चाह रहा था. यदि गड़बड़ हो जाती तो पता नहीं वो क्या सोचतीं और मेरी शिकायत मेरी जीएफ से कर देतीं तो सब कुछ बिगड़ जाता.

इसलिए मैंने उनकी आँखों में झांकते हुए कहा- अच्छा ये बताओ कि आपने उस औरत को देखा है, जिसके साथ आपके पति का चक्कर चल रहा है?
आंटी बोलीं- हां देखा है.. साली सूखा छुआरा सा लगती है.. न सीना है.. न पिछवाड़ा है.
मैं समझ गया कि आंटी गरम हो रही हैं.

मैंने पूछा- इसका मतलब उसका सीना और पिछवाड़ा बिलकुल भी उठा हुआ नहीं है?
वे अपने मम्मे उठाते हुए बोलीं- ये देखा जैसे मेरे बूब्स हैं, ऐसे नाप में तो उस जैसी के तीन बार समा जाएंगे.
मैंने कहा- आपके तो वाकयी बहुत बड़े हैं.

मेरी बात सुनकर उन्होंने अपना पल्लू गिरा दिया और गहरे गले वाले ब्लाउज में से उनकी दूधिया घाटी दिखने लगी.

आंटी- तू सही कह रहा है, वो मेरे जैसी हॉट नहीं है.
मैंने कहा- वाओ सबसे ज्यादा आपके बूब्स हॉट हैं.
उन्होंने ये बात सुनते ही नजरें नीचे कर लीं.

तभी मैंने मौके पर चौका मारा. मैंने आंटी से कहा कि क्या मैं आपके बूब्स एक बार छू सकता हूँ.
तो वो कुछ नहीं बोलीं, मैंने भी हिम्मत करके उनके मम्मों को छू लिया. वो एकदम से शर्मा गईं.

उनके मम्मों का स्पर्श पाकर मेरा तो लंड एकदम से खड़ा हो गया. उन्होंने मेरे खड़े लंड को देख लिया. फिर मैं उनके मम्मों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा. आंटी के मम्मों की साइज़ का सही अंदाजा हुआ तो समझ आया कि आंटी चूचियां नहीं बड़े बड़े चूचे थे. मेरे प्यार से सहलाने के कारण आंटी के खरबूजे जैसे विशाल स्तन कड़क हो चुके थे. ये इतने बड़े-बड़े थे कि मैं एक हाथ से दबा नहीं पा रहा था. मुझे दोनों हाथों से एक को दबाना पड़ रहा था.

आंटी गरमा गईं, उनका एक हाथ मेरे कच्छे पर आ गया, तो मैंने तुरंत अपना कच्छा खोल कर लौड़ा बाहर निकाल लिया. आंटी मेरे लंड को देख कर हैरान हो गईं. आंटी बोलीं- उई माँ.. इतना लम्बा और मोटा लंड.. मैंने तो कभी नहीं देखा.
मैंने कहा- देखा नहीं है तो अब देख लीजिएगा आंटी इसको मुँह में लेकर चूसो न आपको और ज्यादा मजा आएगा.

आंटी तुरंत मेरा लंड अपने मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं. शायद वे मेरे मुँह से यही सुनना चाह रही थीं.
कुछ ही पलों में हम दोनों 69 की अवस्था में आकर मजे करने लगे. आंटी की फ़ुद्दी से नमकीन रस निकल रहा था, मैं अपनी जीभ से आंटी की चूत चोद रहा था.

आंटी ने कहा- अब रहा नहीं जाता, तू मुझे जल्दी से चोद दे.
मैं आंटी को तुरंत उनके रूम में ले आया. कमरे में आते ही मैं उन पर टूट पड़ा और उनके सारे कपड़े उतार कर उनको नंगी कर दिया. आंटी आज अपनी चूत की झांटें साफ़ करके आई थीं. मैंने भी अपने पूरे कपड़े निकाल दिया और अपना लम्बा लंड उनकी नजरों के सामने हिलाने लगा.

आंटी ने फर्श पर बैठ कर एक बार फिर से लंड मुँह में भर लिया. दो मिनट बाद मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटा कर उनकी चुत की फांकों पर अपना लंड रखा और एक झटका दे मारा. आंटी के मुँह से चीख निकल गई, वे कहने लगीं- आह.. बहुत मोटा लंड है.. धीरे धीरे घुसा ना.. बहुत दिन से मेरी चुत ने लौड़ा नहीं लिया है.

आंटी की चूत एकदम कसी थी. वो काफी दिनों से चुदी नहीं थी. मैं अपना लंड हल्का हल्का अन्दर धकेलने लगा. फ़िर मैंने एक तेज झटका मारा तो मेरा 3 इंच लंड आंटी की चुत में अन्दर चला गया.

आंटी एकदम से तड़प कर उछल पड़ीं. बोलीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… धीरे धीरे कर.. दर्द होता है.
मैंने सोचा- एक बार में ही पूरा अन्दर कर देता हूँ, दर्द का झंझट ही खत्म हो जाएगा.
मैंने कहा- आंटी मजा लेना है तो थोड़ा सहन करो यार…

ये कहते ही मैंने एक जोर का झटका दे मारा और पूरा लंड एक ही बार में अन्दर चला गया.
आंटी की आँखों से आँसू निकलने लगे, आंटी चिल्लाने लगी थीं.. और छटपटा रही थीं. मैं दो मिनट के लिए वैसा ही पड़ा रहा, उनके दूध चूसता रहा और उनको चूमता भी रहा.

कुछ पल बाद आंटी की छटपटाहट कम हुई, तो मैं लंड अन्दर-बाहर करने लगा. अब दर्द कम हो जाने के कारण आंटी को मजा आने लगा. मैं चोद रहा था तो आंटी की कामुक सिसकारियां निकलने लगीं. उन्होंने मुझे नीचे से अपनी कमर उठा कर जोर से चोदने का संकेत दिया. तो मैं अब आंटी को जोर जोर से चोदने लगा. पूरा कमरा पलंग की चें..पें.. की आवाज से गूंज रहा था. आंटी ‘आह.. आह.. आह.. ई.. ऊऊई..’ कर रही थीं. मैं जन्नत की सैर कर रहा था.

कई मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था. हम दोनों ने एक दूसरे को कस कर जकड़ लिया और साथ साथ झड़ने लगे.
दो मिनट हम दोनों तक वैसे ही रुके रहे, फ़िर कुछ आखिरी झटके धीरे धीरे लगाए.
आंटी ने बताया कि चुदाई के दौरान वो कई बार बीच में झड़ चुकी थीं.

फिर हम लोग कुछ देर बाद नहाने गए. नहा कर कपड़े पहन कर आंटी ने रसोई में जाकर खाना बनाया.

हम लोग खाना कर टीवी देखने लगे. फिर मैं अपने रूम में चला गया. रात को 12 बज रहे थे, अचानक आंटी की कॉल आयी और मुझसे बोलीं- तेरे अंकल सो रहे हैं.. तू नीचे आकर मुझे चोद दे.

मैं नीचे आया और आंटी को बेड पर लिटाकर को चूमने लगा.
आंटी ने कहा- पहले मेरी चूत में उंगली डाल कर मुझे गर्म कर दे.
मैं तुरंत आंटी की चूत में उंगली करने लगा. उनकी चुत की चिकनाहट से मैं समझ गया कि वो तैयार हो रही हैं.

इधर आंटी ने मेरा लौड़ा भी सहला कर तैयार कर लिया था. मैंने चूत पर लंड रखा एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर कर दिया और रात भर आंटी को इतना चोदा कि सुबह वो ठीक से चल नहीं पा रही थीं. अब जब भी मौका मिलता है, मैं उनके पास जाकर चुदाई कर लेता हूँ.


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