फेसबुक की अनजान लड़की से प्यार


हैलो, मैं राजेश (राज) अहमदाबाद गुजरात से हूँ. मैं 31 साल का एक शादीशुदा युवक हूँ. मेरी हाइट 6 फुट है, दिखने में हैंडसम हूँ औऱ पर्सनालिटी भी अच्छी है. बात करने का स्टायल भी मनभावन है. इसमें विशेषकर ये बताने लायक है कि मैं लोगों से बात करते वक्त उनसे उसकी बात को सुनता हूं, खासकर लेडीज़ की. आप तो जानते ही हैं कि फीमेल में भी यही बात पसंद की जाती है कि कोई उनकी बात को सुने, समझे. पर उसके लिए बहुत टाइम चाहिए, जो सबके लिए बहुत मुश्किल होता है.

मैं एक बड़ी कंपनी में अच्छी पोस्ट पर हूँ, इस वजह से काम बहुत रहता है. फिर भी अब तक मेरा 2 गलफ्रेंड के साथ अफेयर रहा है.

ये एक बिल्कुल सच्ची कहानी है.. उसका मजा लीजिएगा. सन 2010 में फ़ेसबुक का शुरूआत का समय था, तब ज्यादातर फेसबुक आईडी ओरिजिनल ही रहती थीं. उन्हीं दिनों मेरी एक लड़की से बात हुई. उसका नाम संध्या (बदला हुआ) था. शुरू शुरू में हाय हैलो से बात हुई, फिर पता चला कि वो अहमदाबाद की ही है. उससे कुछ बात हुई औऱ बातों बातों में उसने बताया कि वो पीजी कर रही है. उसको कुछ सब्जेक्ट में कंफफ्यूज़न था. चूंकि मैंने फार्मसी किया है, तो मैं ये सब काफी अच्छे से जानता था.

मैंने उसकी मदद की और उसके सारे सवाल सॉल्व कर दिए. फिर दूसरे दिन उसने दूसरा सवाल पूछा तो मैंने उसका भी जवाब दिया. ऐसा 5 दिन तक चला.

दअरसल वो पढ़ने में बहुत होशियार थी और मैंने उसको काफी हेल्प की, इसके चलते वो मुझसे काफी इम्प्रेस हो गई थी. फिर एक दिन मैंने मोबाइल नंबर मांगा, उसने दे दिया. फिर हमारी रोज बातें होने लगीं.

मैं जल्दी से किसी से दोस्ती नहीं करता और अगर करता हूँ तो दिल से निभाता हूँ.

इस तरह बातें कर करके मैंने उसको जाना तो पता चला कि वो शादीशुदा है. वो शादी के बाद भी पढ़ाई कर रही थी. उसकी ससुराल में सब ठीक था, मगर उसकी सेक्स लाइफ अच्छी नहीं थी. उसका हस्बैंड बिस्तर का खेल बहुत जल्दी खत्म कर देता था.

अपनी 24 साल की बाली उम्र में शादीशुदा लाइफ, वो भी कॉलेज करते हुए ये सब हो रहा था. जबकि वो अपने कॉलेज के कई कपल देखती रहती देखती थी कि हर किसी का अफेयर चल रहा है और सब ख़ुश भी हैं, बस वो ही नहीं है. इससे उसको काफी वेदना सी थी.

दूसरी तरफ मैं भी शादीशुदा था, मगर मैं अपनी सेक्स लाइफ से काफी संतुष्ट था. फिर भी मेरी उससे दोस्ती हो ही गई और सिर्फ दोस्ती ही नहीं, उससे भी ज्यादा हम आगे बढ़ गए थे.

अब हम कभी कभी मिलने लगे, वो अपने बारे में बताती, अपनी पढ़ाई के बारे में कहती. कभी वो अपनी शादी शुदा लाइफ के बारे में वो कुछ बोलती, मैं भी कुछ बताता. फिर हम कभी कॉफ़ी शॉप में, कभी मॉल में मिलते रहे.

एक बार हम दोनों मूवी देखने गए, तब मैंने उसे पहली बार किस किया. क्या गुलाबी होंठ थे उसके.. आह.. एकदम मखमली गाल थे. थियेटर में मैं उसके गाल पे किस कर रहा था और बोल रहा था- तुम बहुत खूबसूरत हो.. बहुत ही खूबसूरत.
यह कहते हुए मैं उसके बदन को सहला रहा था. उसकी भी साँसें गरम हो रही थीं.

मैंने कहा- मैं तुमसे अकेले में मिलना चाहता हूँ, जहां तुम ओर सिर्फ में ही रहूँ.
मैं कहना ये चाहता था कि मैं तुमको चोदना चाहता हूँ.. लेकिन मुझे गंदी भाषा लड़की के सामने बोलना पसन्द नहीं है और अच्छी लड़कियां भी गंदे शब्दों को सुनना पसंद नहीं करती हैं. ये भाषा जब तक दोनों एक हद से आगे ना बढ़ें, तब तक नहीं बोलना चाहिए.. फिर सब कुछ जायज हो जाता है.

दूसरे दिन सुबह को मैंने उसे पिक किया और कार में बैठाते ही मैंने उसे किस किया. फिर पूरे रास्ते में उसका हाथ मेरे हाथ के ऊपर था. मेरा हाथ कार के गियर के ऊपर था. वो धीरे धीरे मेरे हाथों को सहला रही थी. तय शुदा प्रोग्राम के अनुसार हम दोनों ने एक होटल में पहुंच गए. रूम में जाते ही मैंने उसे किस किया. उसकी कमर को पकड़ते हुए मैंने उसे बांहों में भर लिया. वो भी बहुत प्यासी लग रही थी.

उसके बारे में तो बताना भूल ही गया वो 5.9 इंच की थी. उसकी 34-28-36 की फिगर, गोरा रंग, गुलाबी होंठ और उसके कोमल गाल.. वाह.. कमाल की सुंदर थी वो. इधर मैं भी 6 फुट लंबा हूँ, दिखने में एक डॉक्टर जैसा दिखता हूँ.

मैंने उसको उठाकर अपनी बांहों में भर लिया. अब मेरा एक हाथ उसके गले के नीचे था और एक हाथ उसके घुटनों के नीचे था. उसके दोनों हाथ मेरे गले में थे और वो मुझे किस कर रही थी. फिर मैं उसे बेड पे ले गया और उसे वहां लिटा दिया. मैं उसको किस करने लगा. इसके बाद मैंने उसके टॉप में हाथ डाला और उसकी चूचियों को सहलाने लगा.

कुछ देर बाद चुदास भड़क गई तो मैंने उसके टॉप को निकाल दिया. धीरे धीरे उसके गले को किस करते हुए उसके मम्मों को किस किया. उसके मम्मे बहुत ही मस्त थे. मैंने बहुत चूसे.. और मनभर के दबाए भी.
उसकी मदभरी आहें भी निकलने लगीं. मैंने उसकी जीन्स को निकाल दिया और साथ में उसकी पैंटी भी निकाल दी. उसकी चूत पे एक भी बाल नहीं था.

मैंने उसे किस किया. उसकी चूत में अपनी जीभ फेरने लगा. मैं उसके दाने को सहलाए जा रहा था और उसमें अपनी जीभ डाल रहा था. उसने भी अपनी टांगें फैला कर चुत उठा दी थी.. मैं जितना अन्दर हो सकता था, उतने अन्दर तक जीभ से चुत को चोद रहा था. फिर उसके चूत के दोनों लिप्स को पकड़ कर, उसे ऊपर करके उस पर अपनी जीभ को फेरने लगा.

वो भी जम के मजा ले रही थी. वो मादक सिसकारियां ले रही थी. वो बोल रही थी- आह.. राज उमम्म्म तुम बहुत अच्छे हो.. ऐसा आज तक मुझे किसी ने किस नहीं किया.. आह.. मैं बहुत ही प्यासी हूँ.
मैं बोला- डियर, अभी तो शुरूआत है.. मैं प्रॉमिस करता हूँ कि आज तुम्हारी सारी प्यास बुझा दूंगा, मैं कोशिश करूँगा कि तुम 100% संतुष्ट हो जाओ.

फिर मैंने उसको पूरे बदन को किस किया पैर पर, उसके घुटनों पे, उसके पैरों की उंगली से लेकर पूरे बदन पर चूमा.
मुझे मालूम था कि किसी औरत को उसके कान पे, गले पर, होंठों पे और उसकी जांघों से लेकर उसके भग्नासे को किस करने से उसको बहुत मजा आता है.. और मैं ये सब कहां छोड़ने वाला था. कम से कम मैंने 40 मिनट तक उसके पूरे बदन पे किस किया.

यह फ़ोरप्ले बहुत जरूरी होता है, जिसे हो सके तो ज्यादा से ज्यादा एन्जॉय करना चाहिए.

वो बहुत ही उतावली हो रही थी, बोल रही थी- आह.. और मत तड़पाओ.. जल्दी से डाल दो.
वो अपनी कमर ऊपर नीचे करने लगी थी और बीच में एक बार झड़ भी गई. फिर भी मैं उसकी चूत को चूसता रहा और उसके सारे रस को पी गया.

कुछ देर निढाल रहने के बाद वो बहुत उतावली हो रही थी और बोले जा रही थी- आह.. अब मत तड़पाओ.. डाल भी दो अब.

मैंने फिर से बोला- अभी तो मैंने तुझे किस किया, तुझे चूमा है.. मगर मुझे तो तूने किस नहीं किया. मेरा लंड अपने मुँह में नहीं लिया.. अभी मेरा टर्न बाकी है.
वो बोली- मैं आपको वो सब बाद में करूँगी प्लीज़.. अब मत तड़पाओ.

मैंने भी समझते हुए कन्डोम पहनने के बाद लंड का सुपारा उसकी चूत में डाला. वो मोटे सुपारे का अहसास करते ही बोली- यार ये तो बहुत बड़ा है.. मेरे हस्बैंड का 6 इंच का ही है.
मेरा लंड 8 इंच का है, वो भी मोटा खीरा सा है, हां थोड़ा काला जरूर है, मगर मस्त है. पता नहीं क्यों, हम चाहे कितने भी गोरे क्यों न हो, लंड थोड़ा काला ही रहता है.

अब उसको मैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया. उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया. उसके दोनों हाथ मेरे हाथों में और मेरे दोनों पैर उसके दोनों पैरों को खोल के ऊपर सहलाते हुए और धीरे धीरे मैं उसकी चूत में अपना लंड डाल रहा था. वो मस्ती से कराह रही थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

मैं पूरा उसके ऊपर चढ़ा हुआ था और धीरे धीरे उसे चोद रहा था.
सही मजा इसी में है.. धीरे धीरे करते हुए फिर स्पीड बढ़ाना चाहिए, इससे लंड का पानी भी जल्दी नहीं छूटता.

तकरीबन 5 मिनट तक मैं उसको ऐसे ही चोदता रहा. फिर मैंने उसके पैर ऊपर किये और उसके दोनों पैर ऊपर करके उसके अपने हाथों से पकड़ कर फिर एक बार शुरू हो गया. मैं जानता था कि वो चुदी हुई तो है, मगर उतनी नहीं. इसलिए पहले मैं उसको धीरे धीरे चोद रहा था.. मगर अब स्पीड बढ़ा दी.

मैंने उसका एक पैर पकड़ा हुआ था और दूसरा पैर उसने थोड़ा ऊपर कर रखा था. इस मिशनरी आसन में मैं मस्ती से उसे चोद रहा था और साथ में चुदाई देख भी रहा था. मेरा लंड उसकी चूत में जा रहा था, ऐसा लग रहा था कि उसकी सॉफ्ट सॉफ्ट चूत को मेरा लंड फाड़ रहा है. एक अलग ही मजा आ रहा था.

फिर मैंने उसके पैर को छोड़कर उसके बड़े से कबूतर पकड़ लिए और दबाते हुए उसे चोदना चालू कर दिया. मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. अब मैं उसको एक मशीन की तरह धनाधन चोद रहा था. वो अजीब तरह की आवाज निकाल रही थी और उसकी मदमस्त कामुक आवाज से मुझे और भी मजा आ रहा था.

वो अकड़ चली थी. फिर मैंने एक जोर का झटके के साथ अपना पानी छोड़ा और उसके ऊपर ही ढेर हो गया.
झड़ने के बाद मैंने उसके चेहरे को देखा, उसके चेहरे पर एक अजीब तरह की सुकून भरी मुस्कान थी. वो बोली- राज आज आपने पहली बार इतना एन्जॉय किया.. मुझसे भी बहुत ही मजा आया. पता है, मैं तीन बार झड़ चुकी हूं.

उसकी ख़ुशी देख कर मुझे भी बहुत ही अच्छा लगा कि मैंने किसी को खुश किया. इसमें मुझे भी बहुत मजा आया था.

अब तक डेढ़ घंटा बीत चुका था और थोड़ी भूख भी लग आई थी.. तो हमने रूम सर्विस में फ़ोन करके खाना मँगवाया. वो खाना आने और खाने तक हमने बहुत सी बातें की. अपने घर की, जॉब की, उसकी पढ़ाई की, उसकी शादी की.

उसने बताया कि उसकी शादी अरेंज मैरेज हुई. पहले अपने मंगेतर अच्छे लगे थे और वैसे अच्छे हैं भी. उसकी बहुत केयर करते हैं और बहुत अच्छी तरह से रखते हैं, मगर एक औरत को उससे भी कुछ ज्यादा चाहिए होता है. और ज्यादा क्या.. जो हक़ है.. वही तो चाहिए ना!
अगर सेक्स लाइफ में मर्द की जरूरत के हिसाब से सेक्स करे और सोचे भी नहीं तो औरत की उससे क्या फायदा? दूसरा, एक अपनेपन का एहसास भी काफी जरूरी है और वो बातें करने से मिलता है.
एक ऐसी फीलिंग कि कोई बात नहीं, चाहे जमाना आपके साथ हो या ना हो, कोई आपकी बात सुने या न सुने, माने या ना माने लेकिन मेरे साथ कोई है. और वो एहसास बहुत जरूरी होता है.

उसकी बात सुनकर मैंने भी देर ना करते हुए बोला- संध्या अपनी आंखें बंद करो प्लीज.
तो वह पहले थोड़ा मुस्कुराई और उसने अपनी आंखें बंद कर लीं. मैंने उसकी चेयर को थोड़ा घुमाया और फ़िर उसे धीरे से खड़ा कर दिया. उसकी आंखें बंद थीं तो मैंने अपने लैपटॉप के बैग में हाथ डाला और उसमें से एक गुलाब निकाला, जो मैं उसके लिए लेकर गया था.

फिर उसके सामने में घुटनों पे बैठ गया और उससे आंख खोलने के लिए कहा. उसने जैसे ही आँखें खोलीं, मैंने एक रोमांटिक सी शायरी बोलते हुए उसे वो फूल दे दिया.
मैं बोला- संध्या, तुम कहीं भी किसी भी स्थिति में रहो.. मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ. मानसिक शारीरिक या फिर सिर्फ बातें करने के लिए, जिस तरह से तुम चाहो या सोचो, मैं तुम्हारे साथ हूं और वो भी जब तक तुम चाहो, बोलो तो लाइफ टाइम के लिए, बोलो तो सिर्फ आज के लिए. उसके बाद में तुम्हें कभी नहीं मिलूंगा. मेरे लिए तुम खुश रहो, ये ज्यादा जरूरी है. मैं तुम्हारी स्माइल का दीवाना हूं और ये स्माइल बनी रहने के लिए जो हो सके वो करने के लिए तैयार हूं. मैं जानता हूँ कि तुम शादीशुदा हो और में भी शादीशुदा हूं.. मगर फिर भी मैं जितना समय में हूँ, उतना तुम्हारे लिए हाजिर हूं. वैसे भी मैं काफी बाहर रहता हूं, पूरा गुजरात घूमता रहता हूँ तो तुम मुझे कभी भी फोन कर सकती हो. तेरा राज हमेशा तेरे लिए हाजिर रहेगा. कम शब्दों में यदि कहूँ तो बिन फेरे हम तेरे.

वो मेरी बात सुनकर भावुक हो गई. उसकी आँखों से आंसू टपक पड़े. वो बोली- राज, आप इतने अच्छे हो कि मैं आपको कभी भी छोड़ना नहीं चाहती. मैं जानती हूं कि आप बहुत अच्छी दोस्ती निभा रहे हो, जो प्यार से भी बढ़कर है. राज, मैं भी तुम्हें प्रॉमिस करती हूँ कि मैं जितना भी टाइम आपके साथ रहूँ, आपको बहुत खुश रखूंगी.

मैंने सोचा, अब ये बातें थोड़ी ज्यादा ही इमोशनल हो रही हैं अगर ऐसा ही चलता रहा तो आगे चलके अपनी वैवाहिक लाइफ़ तकलीफ हो सकती है. तो मैंने थोड़ी बातें चेंज करनी सोची.
मैंने कहा- संध्या एक बात बोलूँ, तुम जितना वक़्त साथ हो, उतना तो वक़्त हम आसानी अच्छा बना सकते हैं. एक मूवी में डॉयलॉग है, ‘जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं..’ जिंदगी के एक एक पल को बड़ा बनाओ. वैसे, अभी इतनी रोमान्टिक बात करके मेरा वो भी बड़ा हो गया है.
वो थोड़ा मुस्कुराई- ओके चलो, इसे और और बड़ा बनाते हैं. आज तुमने पहली बार मुझे तीन बार संतुष्ट किया है, अब मैं भी तुम्हारा 3 बार रस निकालूँगी.. अब मेरी बारी है.

फिर वो शुरू हो गई. बेड पे आने के बाद वो मुझ पर सवार हो गई और किस करने लगी. मेरे सारे कपड़े निकाल फेंके और पागलों की तरह मुझे किस करने लगी. उसने बड़ी गर्मजोशी से मेरे पूरे बदन पर किस किया और फिर मेरा लंड चूसने लगी. वो कभी कभी मेरी गोटियां भी अपने मुँह में लेती थी. मुझसे भी रहा नहीं गया, तो मैंने एक एक कर उसके सारे कपड़े निकाल दिए और उसकी कमर को मेरे मुँह की तरफ ले लिया.

फिर हम 69 पोजीशन में आ गए. अब वो मेरा लंड चूस रही थी और मैं उसकी चूत को किस कर रहा था, उसे चाट रहा था. सही में, बहुत ही मजा आ रहा था.
इसी तरह करते करते वो फिर से झड़ गई और मैंने भी उसका रस चूस लिया. उसने मेरा सारा लावा पी लिया था. वो अजीब तरह की आवाज़ निकाल रही थी.

मैं झड़ चुका था, फिर भी उसने मुझे नहीं छोड़ा नहीं और लंड चूसती रही. इससे मेरा लंड 2 मिनट में फिर से रेडी हो गया.
मेरे खड़े लंड को हिलाते हुए वो बोली- राज, आज मैं तुम्हें खा जाऊँगी. आज एक लड़की एक लड़के के ऊपर रे प करेगी.. मगर इतना पक्का है कि तुम बहुत खुश हो जाओगे.
ऐसा बोलकर उसने मेरे हाथ को बहुत ज़ोर से पकड़ लिया और मेरे ऊपर सवार हो गई. मैं समझ गया कि अब ये वाईल्ड सेक्स चाहती है, तो मैं भी उसी हिसाब से तैयार हो गया.

उसने मेरे ऊपर आके मेरे लंड को अपनी चूत में लिया और धीरे धीरे हिलने लगी मगर उसको ऐसे जम नहीं रहा था. उसको इतनी प्रेक्टिस भी नहीं थीं.
मैं नीचे से अपनी कमर हिलाते हुए उसे चोदने लगा. थोड़ी देर ऐसे ही चोदने के बाद मैंने उसे डॉगी स्टाइल के लिए बोला. तो वो झट से घोड़ी बन गई और मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया. वो थोड़ा सा कराही, फिर भी मैंने चालू ही रखा. थोड़ी देर मैं वैसे ही चोदने में लगा रहा. बीच बीच में कुछ जोर के झटके मार देता. इन लम्बे झटकों से मेरा लंड उसकी बच्चेदानी तक छू रहा था. साथ में में उसके चूतड़ों को भी सहलाए जा रहा था. उसके बोबे भी दबा रहा था.

काफी स्पीड में चुदाई हो रही थी. मेरा 8 इंच का लंड उसकी चूत को फाड़ रहा था.
मैं बोले जा रहा था- आह.. आज मैं तेरी सारी प्यास मिटा दूंगा.. आप इस कहानी को HotStory.Xyz में पढ़ रहे हैं। आह्ह मज़ा आ रहा है ना मेरी रानी?
“यस बहुत मजा आ रहा है.. बस करते रहो.. तुम बहुत अच्छा चोद रहे हो…”
मैं बोला- मैं भी चुदाई जैसे शब्दों का इस्तेमाल करूँ क्या?
“उसमें क्या दिक्कत है?”
“ना वो बात नहीं.. मैंने अभी तक कोई भी गंदे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया, जब तक एक अच्छी रिलेशनशिप न हो जाए, तब तक इसे मैं इस्तेमाल नहीं करता.”
“टेक इट डियर, एन्जॉय इट जान…”

बस मैं उसे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. फिर कुछ झटके के साथ में हम दोनों साथ में झड़ गए और हम थक कर डॉगी स्टाइल से नीचे बिस्तर पर गिर गए और हांफने लगे और ऐसे ही हम कब सो गए, पता ही नहीं लगा.

आह.. क्या मज़ा आया था. एक अच्छे सेक्स के बाद एक दूसरे की बांहों में सोने का मज़ा ही अलग होता है.

फिर करीब एक घंटे के बाद मेरी आँख खुली तो वो मेरे बालों को हल्के से सहला रही थी. मेरी आँख खुलते देख उसने मुझे किस किया और हम फिर से शुरू हो गए. इस बार मैंने उसकी गांड मारने की सोची और उससे कहा तो उसने पहले तो मना किया. वो बोली कि उसने ऐसा कभी नहीं किया और सुना है कि उसमें बहुत दर्द होता है.
मैं बोला- देखो, मेरे पास एक जैली है, उसके इस्तेमाल से तुम्हें दर्द नहीं होगा, फिर भी तुम्हें दर्द हो तो हम वो नहीं करेंगे, पर कोशिश तो कर सकते हैं.
इस पर वो मान गई.

अब मैंने उसको एक बार फिर से घोड़ी बनाया और उसकी चूत को किस करने के बाद उसकी गांड को किस किया. उसकी गांड में अपनी जीभ फ़ेरी, वो सिहर उठी.
फिर मैंने जैली लेकर उसकी गांड में लगाई और इसके एक दो पल बाद मैंने उसकी गांड में अपनी एक उंगली थोड़ी सी अन्दर डाली. उसको दर्द नहीं हुआ. थोड़ी देर कोशिश करने के बाद मेरी पूरी उंगली उसमें चली गई. मैंने उससे पूछा कुछ दर्द तो नहीं हुआ?
उसने कहा- नहीं.. बल्कि मजा सा आ रहा है.

अब मैंने अपना लंड उसकी गांड पे रखा और थोड़ा सा अन्दर डाला तो वो हल्के से चीख उठी और बोली- नहीं.. बाहर निकालो.. दर्द हो रहा ही.. मुझे नहीं करवाना.. प्लीज़ मुझे छोड़ दो.
मैंने लंड नहीं हटाया और उसकी चूचियों को सहलाते हुए कहा- एक काम करता हूँ मैं लंड निकाल कर फिर से जैली लगाता हूँ और अपने लंड पे भी लगा देता हूं. हो सकता है उंगली ने जैली का असर खत्म कर दिया हो.

उसने कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने लंड बाहर खींचा वैसा ही दुबारा करते हुए मैंने जैली लगा दी. इसके बाद फिर से कोशिश की. ये जैली मेडिकेटेड थी तो उसने तुरन्त असर दिखाया. इस बार मेरा लंड थोड़ा सा अन्दर गया तो वो एन्जॉय कर रही थी. अभी मैंने थोड़ा सा ही लंड डाला था और उसको धीरे धीरे चोद रहा था.
उसने पूछा- कितना अन्दर गया?
मैं बोला- पूरा चला गया.

हालांकि अभी मेरा आधा लंड भी नहीं गया था और मैं वैसे ही उसे धीरे धीरे चोद रहा था.
फिर मैंने पूछा- अब मज़ा आ रहा है.. तो स्पीड बढ़ाऊँ?
तो उसने हाँ बोला और फिर उसे उसे थोड़ा जोर से चोदने लगा और लंड भी अन्दर डालता गया. इस तरह पूरा लंड अन्दर डाल दिया और फिर जोर जोर से उसकी गांड मारने लगा. उसको भी मजा आ रहा था.

काफी देर तक उसकी गांड मारने के बाद में झड़ गया.
थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद हम दोनों साथ में नहाये. और नहाते हुए फिर से एक बार चुदाई की.

कुल मिला कर करीब 9 घंटे में हमने 3 बार चुदाई की और एक बार गांड भी मारी. वो अब तक 7 बार झड़ चुकी थी. फिर बहुत सी यादें लिए और एक दूसरे के लिए कभी फिर मिलने का प्रॉमिस लिए हुए हम दोनों अलग हुए.

इसके बाद हम कई बार मिले और सेक्स का मजा लिया.


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