बीवी को गैर मर्द के नीचे देखने की चाहत-2


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(Bivi Ko Gair Mard Ke niche Dekhane Ki chahat- Part 2)

मेरी सेक्स कहानी के पिछले भाग
बीवी को गैर मर्द के नीचे देखने की चाहत-1
में आपने पढ़ा कि मैं अपनी बीवी को किसी पराये मर्द से चुदती हुई देखना चाहता था लेकिन वो इस काम के लिए राजी नहीं थी. जैसे कैसे मैंने उसके मन में पराये आदमी से चूत चुदाई की बात बैठा दी.

अब आगे:

हम दोनों पति पत्नी अब ऋषिकेश के लिए निकल चुके थे. वहां पहुच कर हमने होटल बुक किया और मैंने राज को मिलने के लिए बुलाया.

मैंने उससे अकेले मिलना ही बेहतर समझा, लिहाजा मैंने मंजू को रूम में ही रहने को बोला और राज से मिलने चला गया.
उसके बारे में सोच कर मैं थोड़ा नर्वस भी था और उतेजित भी कैसा होगा? क्या होगा? लेखक है तो ना जाने उसका व्यवहार कैसा होगा? इत्यादि!

कुछ देर बाद राज आया, हम दोनों ने हाथ मिला कर एक दूसरे का स्वागत किया, शुरू शुरू में तो हम दोनों काफी चुप थे लेकिन फिर बात होनी शुरू हो गयी, बातों बातों में राज ने मुझे ड्रिंक्स के लिए पूछा तो मैं मना नहीं कर पाया.
फिर हम दोनों ने ड्रिंक्स ली और कार लेकर पहाड़ों की तरफ चल पड़े.

हम दोनों कार में थे और नशा भी अच्छा हो गया था.
राज ने मुझसे पूछा- मंजू जी नहीं आयी?
तो मैंने उसे बताया कि वो रूम पर आराम कर रही है.

अब हम दोनों काफी खुल कर बात कर रहे थे, मैंने राज को फिर से अपनी इच्छाएं बताई कि वो मेरी बीवी को चोदे और मैं चुपके से सब देखूं!
राज मुझसे बोला- ठीक है ठीक है! पहले भाभी जी से तो मिला दो!

मैं राज को लेकर रूम पर आ गया मंजू ने लोवर और टॉप पहना हुआ था. मैंने राज और मंजू का आपस में परिचय करवाया! राज की आखों में चमक थी, वो मेरी मंजू को देख खुश था!

राज ने हमें कैम्पिंग करने के लिए कहा तो हम तीनों शिवपुरी कैंपिंग के लिए चल दिये. वहाँ राज ने सारी व्यवस्था पहले ही कर ली थी, हमें एक टेंट दिया गया, जिसमें 3 बेड लगे थे अलग अलग!

रात हो चली थी, हम तीनों ने थोड़ी थोड़ी शराब का स्वाद चख लिया, खाना खा लिया… अब बारी थी सोने की!

अब आगे की कहानी राज से सुनिये.

हम तीनों सोने लगे लेकिन मुझे नींद कहाँ… मन में तो मंजू छाई हुई थी! कुछ देर के बाद मुझे लगा कि संजू सो चुका है तो मैं मंजू के बिस्तर में उसके पैरों के पास जाकर बैठ गया!
एक तो जवानी का जोश, ऊपर से संजू को तो चाहता ही था कि मैं कुछ ऐसा करूँ! लिहाजा मुझे संजू से डरने की भी चिंता नहीं थी लेकिन मंजू का सहमति के बिना करने में मुझे डर भी सता रहा था.

मैंने कोशिश बहुत की लेकिन खुद पर कंट्रोल नहीं कर पाया और मेरा हाथ मंजू की टांगों पर चलने लगे, देखते मैं मंजू के जिस्म पर किस करने लगा, मंजू भी मेरा साथ देने लगी. मैं खुशी से और जोश से भरा पड़ा था, खुशी इस बात की कि मंजू मेरा साथ दे रही है और जोश तो मंजू को देख कर ही चढ़ गया था!
मैं मंजू को चूमते उसके स्तनों तक पहुँच गया!

मंजू को नशा भी था और नींद भी… वो नींद में ही कुछ बड़बड़ाये जा रही थी, लेकिन उसकी बात पे ध्यान कौन देता!
जब दिलो दिमाग में हवस हावी हो तो कान कहां काम करते?

मैंने जैसे ही उसकी चुत में हाथ डालने की कोशिश की वो बोल पड़ी- संजू नहीं, राज यही पे है, ऐसा अच्छा नहीं लगता.
मैं सुन्न हो गया… मानो मैं कुछ हूँ ही नहीं! मैं तो बेवजह ही उछाल भर रहा था, मंजू तो मुझे अपना पति समझ रही थी.

जैसे ही उसने मेरे चेहरे को हाथ लगाया वो समझ गयी कि मैं संजू नहीं हूँ, राज हूँ क्योंकि संजू ने दाढ़ी मूँछ रखी थी और मैं बिल्कुल चिकना बन कर गया था.

मंजू ने मुझे अपने बिस्तर में जाने को कहा, मैं ठहरा जोश का मारा… मैं मंजू को चुप करवाते हुए उसे सेक्स के लिए मनाने लगा.
लेकिन वो नहीं मानी, उसने मुझसे कहा- जब संजू नहीं होगा, तब कुछ हो सकता है, उनके सामने नहीं!
और मुझे बिस्तर से धकेल दिया.

मैं चुपचाप अपने बिस्तर में आ गया, जो लंड अभी तक फड़फड़ा रहा था, वो अब मेरी असफलता पे सर झुकाये खड़ा था!
मैं चुपचाप सो गया, सुबह उठने पे मैंने मंजू को देखा… हाय, क्या सेक्सी खूबसूरत बला मेरे सामने थी!
और मैं कुछ नहीं कर पाया. आप इस कहानी को eugenekhan.ru में पढ़ रहे हैं।

अब मेरे सामने नई मुसीबत खड़ी हो चुकी थी, संजू चाहता था कि मैं उसकी बीवी मंजू को उसके सामने चोदूँ और मंजू चाहती थी कि जब संजू न हो तब मंजू को चोदूँ!
समझ नहीं आ रहा था करना क्या है!

तभी कैम्प वाले ने हमें बोला- राफ्टिंग करने जाना है तो तैयार हो जाओ!
हम तीनों राफ्टिंग के लिए चल पड़े.

राफ्ट में बैठेने के बाद मंजू कुछ घबरा सी रही थी मानो उसको गंगा के उछलते लहराते ठन्डे पानी से डर लग रहा हो. मैंने उसे शांत होकर बैठने को कहा. कुछ देर बाद जब हम शांत पानी में गये तो हमारे राफ्ट गाइड ने हमें पानी में कूद कर तैरने को कहा यहां कोई खतरा नहीं है! लाइफ जैकट अपने पहनी हुई है, चिंता की कोई बात नहीं!

मैं और संजू पानी में कूद गये और मंजू भी हमारे साथ आना चाहती थी लेकिन वह डर रही थी मैंने झटके से उसे पानी में खींच लिया. इसी डर से वह मुझसे चिपक गयी, यह देख संजू खुश हो गया.

फिर वहाँ से निकल कर हम लक्ष्मणझूला आ गये, वहां संजू ने होटल बुक किया और मंजू को आराम करने को बोल कर हम दोनों फिर से शराब की तलाश में निकल गये!

रास्ते में ही संजू को कोई फ़ोन आया उसने मुझे बताया कि उन्हें परसों सुबह ही निकलना पड़ेगा.

अब मेरे पास आज और कल की रात थी! समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ क्या नहीं… हर कदम फूंक फूंक के रखना था!
हमने वहां से एक बोतल ली, चिकन लिया और वापस रूम पर आ गये.

शाम हो चली थी, हम दोनों ने दो दो पेग ला गए तो संजू ने मंजू को भी पीने को कहा, मंजू मना करने लगी, उसको ठंडे पानी में नहाने से बदन दर्द जो होने लगा था. फिर हम दोनों के जोर देने पर उसने न न करते हुऐ दो पेग मार लिए और संजू से बोली- मेरा बदन दुख रहा है, संजू कोई दवाई ला दो!
संजू ने उसे समझाया कि शराब के बाद दवाई नहीं खानी चाहिये!

मंजू अब बिस्तर में जा कर लेट गयी, उसे दो हार्ड पेग से ही काफी नशा हो चुका था!
मैंने संजू से कहा- तुम बुरा न मानो तो मैं मंजू का बदन दबा दूँ, इसकी मालिश कर दूं?
संजू बोला- इसमें बुरा मानने वाली कौन सी बात है, करो!

मैं मंजू को बोला- आप शरमाओ मत, आप बस उल्टी होकर लेट जाओ!
मंजू न नुकर करने लगी लेकिन मेरे जोर देने पर हार कर वो शांत लेट गयी!
मैंने उसकी टीशर्ट को ऊपर किया तो मंजू ने चुप चाप उसे ऊपर करने दिया! मैंने उसकी कमर पर थोड़ा सा तेल डाल कर रगड़ना शुरू किया! मंजू की कमर पर अब मेरे हाथ चलने लगे.

तभी संजू का फ़ोन बजा, वो फोन पे बात करता हुआ बालकोनी में चला गया. मैंने मंजू की ब्रा को खोल कर उसकी पूरी पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया! अब मंजू की कामुक आवाजें निकलने लगी थी जो बहुत धीरे धीरे सुनाई दे रही थी!

मैंने अपना काम चालू रखा, कभी कभी मेरे हाथ उसके स्तन को छू जाते तो वो मचल जाती! तभी संजू अंदर आया और बोला- यार यहाँ पर मेरा फ़ोन का बैलेंस खत्म हो गया है, रोमिंग में काम नहीं कर रहा, मैं एक रिचार्ज करवा कर आता हूँ!
और जाते जाते उसने मुझे आंख मार दी!

मैं समझ गया कि मेरा रास्ता साफ है… वो भी दोनों तरफ से!
संजू जैसे ही बाहर गया, मैंने मंजू की पीठ को किस करना शुरू कर दिया.
मंजू घबरा कर मेरी तरफ पलटी, बोली- राज, क्या कर रहे हो? संजू आ जायेगा प्लीज़ छोड़ो मुझे!

लेकिन संजू का डर था किसे? मैंने उसको समझाया कि रिचार्ज की दुकान पास में नहीं है उसके लिए उसे थोड़ा आगे बाजार में जाना होगा, उसको आधा घन्टा लग जायेगा! तुम चिंता न करो और उसके स्तनों को दबाने लगा.
देखते ही देखते मैं उसका एक स्तन मुंह में लेकर चूसने लगा. मंजू मचल पड़ी और दोनों हाथों से मुझे अपने सीने से लगाने लगी!
अब मैंने मंजू के दोनों हाथों को उसकी कलाई से पकड़ा और बिस्तर में उसके ऊपर आ गया! और उसके होंठ चूसने लगा.

जिस प्रकार पति/पुरुष के दिल का रास्ता उसकी जीभ से होकर गुजरता है उसी प्रकार पत्नी/महिला की चूत का रास्ता उसके रसीले होंठों से गुजरता है!
स्त्री के होंठ अगर प्यार से और बढ़िया अंदाज में चूसे जायें तो उसे उत्तेजित करने के लिए उतना ही काफी है, मंजू का हाल भी कुछ ऐसा ही था, वो खुद को समर्पित कर देना चाहती थी!

मैंने उसके होंठों का रसपान जारी रखा और एक हाथ उसके लोवर में डाल दिया. हालांकि उसने विरोध किया लेकिन वो मात्र औपचारिकता थी!

अब मेरा हाथ उसकी चुत पर था! मैं जैसे जैसे चुत के ऊपरी भाग को रगड़ता, मंजू मचल पड़ती, उसकी कामुक सिसकारियाँ मुझे और बेकरार कर रही थी! मैंने मंजू के लोअर को नीचे कर दिया और फिर उसकी नाभि पर किस करते हुए उसकी पेंटी पर आ गया! मेरे हाथ मंजू के स्तनों को दबाने में व्यस्त थे. मैंने अपने दांतों से मंजू की पेंटी को पकड़ा और उसको नीचे करना शुरू किया, मंजू ने भी कमर उठा कर पेंटी नीचे करने में मेरा साथ दिया!
अब मंजू जन्मजात नंगी मेरे सामने थी!

मैंने उसकी चिकनी गुलाबी चुत देखी और उस पर टूट पड़ा, मैं बस उसकी चुत के ऊपरी हिस्से में चूमता जा रहा था और मंजू खुद ब खुद अपनी टांगों को फैला रही थी! जैसे ही मुझे चुत में जीभ डालने का मौका मिला मैंने अपने हाथ उसके स्तनों से हटाकर उसकी जांघों को कस कर पकड़ लिया. अब मेरी जीभ उसकी चुत में अपना असर छोड़ रही थी और जो मंजू अभी तक मुझे अपने हाथों से हटा रही थी, अब वही हाथ उसके खुद के स्तनों को दबाने में व्यस्त हो गए थे.
अब न मंजू को पति का डर था न किसी की शर्म वो बस चुदने को बेताब थी!

मैंने मंजू की चूत में जीभ और बीच की उंगली दोनों डाल ली, मंजू अब तड़पने लगी, वो कामवश होकर मुझे दोनों टांगों से जकड़ रही थी.
अब मंजू से सहा नहीं गया, उसने मुझे अपने ऊपर खींचने की कोशिस की लेकिन मैं टस से मस नहीं हुआ! अब बेचैन मंजू मुझे नीचे लेटाकर खुद मेरे ऊपर आ गयी और मेरी पेंट खोल कर नीचे करने लगी.
मैंने खुद ही खड़े होकर अपने कपड़े उतार दिए!

मैंने मंजू के मुख में अपना लन्ड डालने का प्रयास किया लेकिन मंजू ने मना कर दिया. शायद वो शर्मा रही थी. मैंने भी उसे लन्ड चूसने के लिए ज्यादा जोर देना ठीक नहीं समझा और मैं फिर से उसकी चुत चाटने लगा. अबकी बार मैं 69 की स्थिति में था जहां मैं मंजू की चूत को चूस रहा था और वो मचले जा रही थी.

एक समय ऐसा आया कि उसने मेरा लन्ड पकड़ा और हिलाना चालू कर दिया और देखते ही देखते उसे चूसने लगी. उसकी लन्ड चुसाई ने मेरे लन्ड को फौलाद बना दिया था!

मैंने उसके मुख से लन्ड निकाला और उसके ऊपर लेट गया! लन्ड अब उसकी चुत के ऊपर टकरा रहा था! मैंने मंजू को कभी गर्दन कभी गाल कभी कंधे कभी गला पे चूमना चालू रखा!
मंजू बोल पड़ी- राज बहुत हो गया है, संजू आ गए तो गड़बड़ हो जायेगी! ना जाने वो कैसे फील करेंगे, प्लीज़ छोड़ दो अब!

मैं उसकी बात को अनसुना कर लन्ड थोड़ा और अंदर को धकेलने की कोशिश करने लगा, कुछ देर में लन्ड से चुत की बाहरी दीवारों के घर्षण से मंजू मस्त होने लगी और धीरे धीरे अपनी टांगें खोल कर कमर उठा कर मेरा साथ देने लगी.
मैंने मौका देखते ही एक जोर का प्रहार उसकी चुत में किया वो एक बार चीखी उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह… और शांत लेट गयी!

वो समझ चुकी थी कि अब देर हो चुकी है, उसने किसी गैर मर्द का लन्ड अपनी चुत में घुसवा दिया है अब या तो अफसोस करो या मज़ा… उसने मज़ा चुना और मेरा साथ देने लगी!
अब वो मस्ती में चुद रही थी, उसके नाखून मेरी पीठ को चीर रहे थे जो इस बात के भी गवाह थे कि वो किस कदर आनन्द के सागर में गोते लगा रही है. उसके दांत मेरे गालों पर, गर्दन पर अपने निशान छोड़ रहे थे!

दोस्तो, कभी स्खलित होती हुई स्त्री के मुख पर गौर किया है? उसके गले को, स्तनों को देखा है?
यदि नहीं तो इस बार तो कीजियेगा!
आप पाएंगे कि वो सुख जो सच में एक अलग अनुभूति देता है! उसके द्वारा स्खलन के समय की जाने वाली गतिविधि वो किस कदर पागलो की भाँति हरकतें करती है! कभी अपने बालों को नोचेगी! कभी आपके हाथों पर नाखून चुभायेगी! कभी खुद के होंठों को काटेगी! कभी कुछ… कभी कुछ!

सभी पुरुष शायद ही इस बात को जानते हों कि यौन सुख का कितना मज़ा स्त्री लेती है बस वो पूर्ण स्खलित हो जाये तो! पुरुष हमेशा अपने स्खलन के बारे में सोचते हैं और स्खलित होते ही सो जाते हैं! कभी अपनी अंकशायिनी के बारे में भी सोचें कि उसके दिल पर कैसी बीतती होगी.

मंजू ने मुझे अपने गले से लगा कर कस लिया था और उसकी कमर इतनी तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी मानो लहरा रही हो. उसके जिस्म की गर्मी मेरा लन्ड भी नहीं झेल पा रहा था! मानो भट्टी में तप रहा हो.
देखते ही देखते एक तेज स्वर के साथ के साथ मैं पहले स्खलित होने लगा मेरे स्खलन से हुए लन्ड के तनाव और गर्म वीर्य से मंजू भी मेरे साथ साथ में स्खलित हो गयी, उसकी सिसकारियों से कमरा गूंज उठा. हम दोनों ऐसे पड़े थे मानो जिस्म में जान ही न हो, वो सारा समय कितनी तेजी से गुजरा कुछ पता ही नहीं चला!

मेरे चेहरे पर मंजू को भोगने की खुशी थी! तो मंजू भी देख देख शरमा रही थी.
हम दोनों बिस्तर पर लेटे एक दूसरे को किस करने में लगे थे.

आगे क्या हुआ अगली कहानी में!
आप सभी को मेरी कहानी कैसी लग रही है, मुझे मेल करें, मुझे आपके मेल का इंतजार रहेगा.


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