सरिता और गरिमा की गरमा-गरम चुदाई


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(Sarita Aur Grima ki Grama-Garam Chudai)

मेरा नाम करण है, मैं 23 साल का हूँ।

मैं आज आपको अपनी एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ।

यह बात आज से एक साल पहले की है, उन दिनों मैं कानपुर में रहता था।

मेरी एक गर्लफ्रेंड थी गरिमा… वह काफ़ी सेक्सी थी, उसकी उम्र 20 साल थी।

हम दोनों ही बाहर से कोचिंग करने आये थे, हम पास पास ही रहते थे, वह एक गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी।

एक दिन हमने मूवी देखने का प्लान बनाया।

वह तैयार हो गई, वह बोली- मैं अपनी सहेली के साथ आऊँगी।
रात नौ से बारह का शो था।

रात को गर्ल्स हॉस्टल बंद हो गया था तो मैंने उन दोनों को अपने रूम पर रोक लिया।

मेरे रूम में एक ही बेड था इसलिए हम साथ ही सो गए।

रात में जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि गरिमा मेरा लंड चूस रही थी और उसकी सरिता उसे देख रही थी।

मैं काफ़ी उत्तेजित हो गया था।

मैंने जोश में आकर सरिता को अपनी तरफ खींचा और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।

क्या मुलायम होंठ थे।

उसके स्तन मेरे सीने से टकरा रहे थे।

क्या मस्त बूब्स थे।

गरिमा तो मेरा लंड आइसक्रीम की तरह चूस रही थी, मेरे लंड के गोलों को मुँह में लेकर मेरी गांड में उंगली कर रही थी।

मैं सरिता के ऊपर आ गया, मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी थी, वह काले रंग का ब्रा पहने थी।

मैं उसके गले को चूमता हुआ उसके बूब्स के ऊपर ब्रा तक गया, मैं ऊपर से ही उसके बूब्स के निप्पल को चूसने लगा, वह मदहोश हो

गई।

मैंने झट से उसका ब्रा उतार दी।

आह… क्या बूब्स थे उसके!

मैंने अपने दोनों हाथों से उसके बूब्स को भींच दिया।

उसके मुख से सिसकारियाँ निकल पड़ी।

मैंने उसके दोनों उरोजों को हाथों से कस कर दबा दिया और उसके निप्पल को चूसने और दाँतों से हल्के-हल्के काटने लगा।

उधर गरिमा अपने कपड़े उतार चुकी थी।

मैंने गरिमा को अपनी तरफ खींचा और उसको अपनी गोद में बैठा लिया उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए।

मेरा लंड उसकी चूत से टकरा रहा था और सरिता अपने चूचे पीछे से मेरे सीने पर रगड़ रही थी, अपने हाथों से पीछे से मेरा लंड पकड़

कर सहला रही थी।

सरिता बोली- करण, हम कब से तुम से चुदने का प्लान बना रहीं थीं, आज मौका मिला है, आज तो हम अपनी सील तुड़वा कर ही

रहेंगी।

मैंने बोला- मेरी जान, मेरी तो कब से तुम पर नजर थी। जब से तुम्हारे और गरिमा के बूब्स देखे थे, तभी से मेरा मन तुम दोनों को

चोदने का कर रहा था।

गरिमा बोली- मेरे राजा, आज तो तुम गए, हम आज तुमको नहीं छोड़ने वालीं।

मैंने यह सुनते ही उसके बूब्स को कस कर दबा दिया उसकी तो सिसकारी निकल गई।

मैंने गरिमा की चूत में उंगली की और उसे लिटा दिया और अपना लंड उसकी चूत के किनारे कर रख कर थोड़ा सा अन्दर डाला तो वो

चिल्लाने लगी।

सरिता को एक शरारत सूझी, वह मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई और वह मेरे ऊपर अचानक कूद पड़ी।

मेरा पूरा 7 इंच का लंड गरिमा की चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया।

गरिमा चिल्लाने लगी, उसकी चूत से काफ़ी खून बह रहा था।

मैंने झट से अपने होंठ उसकी होंठों पर रख दिये और उसके बूब्स को सहलाने लगा।

कुछ देर बाद जब उसका दर्द चला गया तो मैंने धक्के लगाना शुरू कर दिया।

सरिता को मैंने काफ़ी डाँटा, सरिता ने भी सॉरी बोला।

मैंने भी सोच लिया आज इसको बता कर ही रहूँगा कि मेरी गरिमा को कितना दर्द हुआ है।

गरिमा को मैंने काफ़ी चोदा, जब वह झड़ गई तो मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और खून साफ़ किया।

मैंने सरिता से बोला- जाओ, फ़्रिज़ से कोल्ड ड्रिंक लेकर आओ।

जब वह कोल्ड ड्रिंक लेने गई तो मैं दरवाजे के पीछे छुप गया, जब वह अन्दर आई तो तो मैं धीरे-धीरे उसके पीछे हो लिया।

जब उसने कोल्ड ड्रिंक की बोतल मेज पर रखी तो मैंने उसके टाइट बूब्स को पीछे से कस कर पकड़ लिया और उसे ऊपर उठा दिया।

उसका बदन नीचे सरकने लगा, उसके मुँह से सिसकारी निकल गई।

मैं उसके बूब्स को भींचने लगा, जब मैंने देखा अब मैं उसके बदन को नहीं संभाल सकता तो मैंने सोचा एक टेक लगा दूँ।

मैंने उसके बूब्स को छोड़ दिया वह तेजी से नीचे सरकने लगी, मेरा लंड पूरा खड़ा था उसकी गांड में घुस गया।

वह चिल्लाने लगी और डर कर भागने लगी।

वह चिल्ला कर भागने लगी, मैंने उसको दौड़ कर पकड़ा और उसको दीवार से सटा दिया।

वह बोली– करण, अब ऐसा मत करना, काफ़ी दर्द होता है।

मैंने कहा- अब पता चला कि कितना दर्द होता है?

मैंने हल्के से उसकी गांड में लंड डाला और उसको चोदने लगा।

कुछ देर चोदने के बाद मैंने उसको सीधा किया और अपना लंड उसकी चूत पर रख दिया।

सरिता की चूत काफ़ी टाइट थी, मैंने गरिमा को वेसलीन लाने के लिया बोला।

वह वेसलीन लेकर आई, मैंने अपने लंड पर वेसलीन लगाया और उसकी चूत पर भी।

वह सिसकारी ले रही थी।

मैंने देर न करते हुए अपना लंड उसकी चूत पर रख कर हल्का सा धक्का लगाया, उसकी चीख़ निकलने लगी, गरिमा ने तुरंत अपने होंठ

उसके होंठ पर रख दिए।

मैंने पूरा लंड सरिता की चूत में डाल दिया।

मैंने गरिमा को कहा कि वह अपने पैर मेरी तरफ कर ले, वह अब भी सरिता का होंठ चूस रही थी।

मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया और उसकी चूत चाटने लगा।

मेरा लंड जोर-जोर के धक्के लगा रहा था, मैंने लपक कर अपने दोनों हाथों से गरिमा की मदमस्त चूचियों को पकड़ लिया और उनको

दबाने लगा।

दोस्तो, काफ़ी मजा आ रहा था।

गरिमा बोली– जानू, कस कर दबाओ।

सरिता ‘आह आह… आह… आह… आह.. आह आह आह आह… की आवाज़ निकाल रही थी।

गरिमा ने अपने दोनों हाथ सरिता की चूचियों पर रख दिया। काफ़ी मस्त नजारा था।

कुछ देर चोदने के बाद मैंने बोला- अब मैं झड़ने वाला हूँ।

सरिता बोली- मेरे अन्दर झड़ो।

गरिमा बोली- मेरे अन्दर।

मैंने दोनों को बेड पर लिटा दिया और गरिमा की चूत में लंड डाल कर हिलाने लगा।

थोड़ी ही देर में मैं झड़ने लगा, थोड़ा सा ही झड़ा था, तुरन्त मैंने अपना लंड निकला और सरिता की चूत में डाल दिया।

इस तरह मैंने काफ़ी मजा किया।

हम तीनों बिना कपड़ों के ही सो गए एक-दूसरे से लिपट कर, मैं बीच में था मैंने अपना लंड गरिमा की चूत में डाल रखा था, उसके

स्तनों को अपने हाथों से दबा रखा था, सरिता भी अपने बूब्स मेरी पीठ पर रगड़ रही थी।

इस तरह हम तीनों सो गए।

सुबह मैंने उन दोनों को हॉस्टल छोड़ दिया।

दोस्तो, यह कहानी आपको कैसी लगी, जरूर ईमेल करें।


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