सोसाइटी की भाभी को पटा कर चुदाई की


(Society Ki Bhabhi Ko Pata Kar Chudai Ki)

नमस्कार दोस्तो, यह मेरी पहली चुदाई की कहानी है. सबसे पहले मैं आपको अपने बारे में बताता हूँ. मेरा नाम विशाल है, मैं एक शादीशुदा इंसान हूँ और अपनी बीवी से खुश हूँ.

मैं एक बड़ी कंपनी में जॉब करता हूँ और दो साल पहले ही पुणे आया था. पुणे आने के बाद मैंने एक घर किराए पर ले लिया. शाम को सोसाइटी में खूब चहल पहल रहती थी. मैं भी ऑफिस से आने के बाद फ्रेश होकर घूमने निकल जाता था. वहाँ हर रोज एक भाभी भी अपनी सहेलियों के साथ आया करती थीं.

आपको उन भाभी के बारे में बता दूं, भाभी देखने में ठीक ठाक थीं, लेकिन उनका 34-30-34 का फिगर बड़े ही कमाल का था, उनके चुचे बहुत ही सख़्त थे और चूतड़ भी कम नहीं थे. मेरा तो उन्हें देखते ही उन पर दिल आ गया था.
मैं हमेशा उन्हें देखता रहता था और वो भी बीच बीच में मुझे देखती थीं, पर सोसाइटी में होने के कारण हम बात नहीं कर सकते थे.

फिर एक दिन शाम को मैं अपनी बाइक से कुछ सामान लेने बाहर गया और वो मुझे सामने से आती हुई दिखीं, बाहर की सड़क पर कोई नहीं था और वो भी अकेली थीं. मैंने मौका ना गँवाते हुए अपनी बाइक थोड़ी पहले ही रोक दी और फोन निकाल कर बात करने लगा. वो मुझे देख कर मुस्कुराईं तो मैंने भी स्माइल दी. उनके पास आते ही मैंने उन्हें हैलो कहा तो उन्होंने भी हैलो बोला.

उसके बाद हमने 3-4 मिनट बात की. भाभी ने पूछा- आप क्या करते हो और घर में कौन कौन है?
मैंने उन्हें सारे जवाब दिए.
फिर उन्होंने कहा कि अभी देर हो रही है और उन्हें जाना होगा.
मैंने उन्हें बाय बोला और बाइक स्टार्ट की. जैसे ही मैं जाने लगा उन्होंने कहा- आपका मोबाइल नंबर मिल सकता है.. क्योंकि हम सोसाइटी में तो बात नहीं कर सकते… और मैं आपको फोन कर लूंगी.
मुझे समझ आ गया था कि भाभी पटने को तैयार हैं.

फिर अगले दिन दोपहर को उनका फोन आया. मैंने पूछा- कौन बोल रहा है?
तो उधर से आवाज़ आई- प्रिया बोल रही हूँ.

फ़िर हमारी बात शुरू हो गई. हम हर रोज दिन में घंटों बातें किया करते थे. धीरे धीरे हम एक दूसरे से सब कुछ शेयर करने लगे और हमारे बीच सेक्स की बातें भी होने लगीं.

मैं आपको बता दूं कि भाभी को एक 6 साल का लड़का भी है और उनकी उमर 34 साल की है.

फिर धीरे धीरे उन्होंने बताया कि अब उनके पति ज़्यादा सेक्स नहीं करते, वे हमेशा काम में बिज़ी रहते हैं.
मैंने मौका देख कर उन्हें बोल दिया कि क्या इस काम मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ?
तो उन्होंने कहा- आप क्या कर सकते हैं?
मैंने कहा- आप कह कर तो देखिए.
फिर भाभी ने कहा- ठीक है.. सोच कर बताती हूँ.

कुछ दिनों तक हमारी नॉर्मल बात चलती रहीं और एक दिन अचानक से उन्होंने बोला कि मेरे पति 2 दिन के लिए बाहर जा रहे हैं, क्या हम कहीं बाहर चल सकते हैं.
मैंने जानबूझ कर पूछा- बाहर किस लिए चलना है भाभी?
भाभी बोलीं- मदद करने का वायदा किया था, अब भूल गए हो क्या?
मैंने हंसते हुए कहा- बस कन्फर्म कर रहा था भाभी.

भाभी बोलीं- अब जल्दी से बताओ भी.. बहुत आग लगी है.
मैंने पूछा- बेटे का क्या करोगी?
तो उन्होंने कहा- उसे उसकी नानी के घर भेज दूँगी.
मैंने कहा- कहाँ चलना है?
तो वो बोलीं- लोनावाला चलते हैं.
मैंने कहा- ठीक है.
उन्होंने कहा- होटल मैं बुक कर दूँगी.

फिर 3 दिन बाद उनका पति दोपहर को निकल गया और शाम तक वो अपने बेटे को भी अपनी माँ के यहाँ छोड़ आईं. इसके बाद उन्होंने मुझे फोन किया कि मैं उनको पिक कर लूँ.

मैंने उनको बाहर से पिक किया और देखा कि उन्होंने सलवार सूट पहना हुआ था और वो मस्त माल लग रही थीं. उसके बाद हम दोनों मेरी कार में लोनावला चल दिए. गाड़ी चलते वक़्त गियर लगाते समय, मैंने उनकी जांघ पर हाथ रख दिया, उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मैं धीरे धीरे उनको सहलाने लगा.

उससे हम दोनों को बड़ा मज़ा आ रहा था. फिर हम लोनावला के होटल में पहुँच गए. उन्होंने सारी फॉरमॅलिटीज पूरी की और हम दोनों रूम में चले गए.

रूम में जाते ही मैंने भाभी को पीछे से पकड़ लिया और उनकी गर्दन पे चूमने लगा. वो तो पहले से ही मस्त थीं, तो मेरा साथ देने लगीं.

फिर भाभी घूम गईं और मुझे गले से लगा लिया. उसके बाद मैंने उनके गले पे किस किया और धीरे धीरे ऊपर आते हुए भाभी के होठों को चूसने लगा. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं और हम एक दूसरे की जीभ को चूसते रहे.आप इस कहानी को eugenekhan.ru में पढ़ रहे हैं।

फिर मैंने भाभी को अपनी बांहों में उठाया और बिस्तर पे ले आया. भाभी के कपड़ों के ऊपर से ही उन्हें किस करने लगा. इसके बाद मैंने उनकी कमीज़ निकाल दी. उन्होंने अन्दर पिंक कलर की ब्रा पहनी हुई थी और वो बहुत ही हॉट लग रही थीं. मैं भाभी के चूचों को ब्रा के ऊपर से ही चूसने लगा और उनके निप्पल को काटने लगा. फिर मैंने भाभी की ब्रा भी खोल दी और उनके सख्त चूचों को देख कर मैं पागल हो गया. आह क्या सख़्त और मस्त चुचे थे भाभी के.. उन पर उनके निप्पल, जो एकदम खड़े हो गए थे, वो और भी सुंदर लग रहे थे.

मैं भाभी के चूचों पे टूट पड़ा.. उन्हें एक एक करके चूसने लगा और एक हाथ से दूसरे चुचे को दबाने लगा.

भाभी भी बहुत गरम हो गई थीं और सिसकारियाँ लेने लगी थीं. मैं अपना हाथ नीचे उनकी नाभि से होते हुए चूत तक ले गया और सलवार के ऊपर से ही उसे दबाने लगा. मैंने देखा भाभी की सलवार गीली हो चुकी थी. मैंने धीरे से उनकी सलवार भी खोल दी और पेंटी को भी उसके साथ ही उतार दिया.

फिर भाभी ने भी मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और हम दोनों नंगे हो गए.

भाभी ने मेरा लंड हाथ में लिया और कहा कि ये तो बहुत बड़ा लंड है, इससे तो चुदने में बहुत मज़ा आएगा.
मैंने उनकी चूत में उंगली करते हुए कहा- मुझे भी भाभी आपको चोदने में बहुत मजा आएगा.. आपकी चूत एकदम टाईट है.

मैं भाभी के ऊपर चढ़ गया और उनके होंठों को चूसने लगा.. उनकी चूत में उंगली करने लगा. वो भी मेरे लंड को आगे पीछे करने लगीं.

फिर मैं धीरे धीरे नीचे गया और उनकी नाभि पर किस करने लगा और साथ साथ उसकी चूत में उंगली भी कर रहा था. भाभी अब बहुत तेज तेज सिसकारियाँ ले रही थीं और बहुत गरम हो चुकी थीं.

उन्होंने कहा- विशाल प्लीज़ अब मत तड़पाओ और मेरे अन्दर अपना वो डाल दो.
मैंने पूछा- वो क्या डाल दूं?
उन्होंने नशीले अंदाज में कहा- मेरी चूत में अपना लंड डाल दो.

मैंने भी देर करना ठीक नहीं समझा और भाभी के ऊपर चुदाई की पोजीशन में आ गया. भाभी ने लंड हाथ में पकड़ा और अपनी चुत पे सैट कर दिया. मैंने एक ज़ोर का धक्का लगाया तो आधा लंड अन्दर चला गया. उन्हें दर्द भी हुआ पर वो सहन कर रही थीं.

फिर मैंने एक और ज़ोर का धक्का दिया तो पूरा लंड भाभी की चूत में समा गया. भाभी चीखने ही वाली थीं कि मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. उनकी आँखों से आँसू आ गए थे. एक बच्चा होने के बाद भी भाभी की चुत बहुत टाइट थी.

थोड़ी देर रुकने के बाद मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए और भाभी को भी अच्छा लगने लगा. भाभी भी मेरा साथ देने लगीं. मैंने अपनी स्पीड थोड़ी बढ़ा दी तो भाभी तेज तेज सिसकारियाँ लेने लगीं- आ.. आ.. आह.. आई.. माँ.. और तेज और तेज करो आह..

मैंने भी अपनी स्पीड और तेज कर दी. बस 5 मिनट के बाद भाभी ने मुझे कस के पकड़ लिया और निढाल हो गईं. भाभी का पानी निकल गया था, पर मैं अभी भी लगा हुआ था. फिर 15-20 धक्कों के बाद मुझे लगा कि मेरा भी काम होने वाला है, तो मैं रुक गया और अपना ध्यान कहीं और लगाने लगा.

जब तक भाभी फिर से गरम हो गईं और मेरे ऊपर आकर लंड अपनी चुत में लेकर कूदने लगीं.

मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा था. भाभी सिसकारियाँ लेकर लंड के ऊपर कूद रही थीं. कुछ 5 मिनट बाद मैं झड़ने को हुआ तो मैंने भाभी को नीचे लेटा दिया और उनके ऊपर आकर तेज तेज धक्के लगाने लगा. बस 8-10 शॉट मारने के बाद मैंने अपना सारा माल भाभी की चूत में भर दिया और उनके ऊपर गिर गया. अब तक वो 3 बार झड़ चुकी थीं.

उसके बाद हम दोनों उठे और बाथरूम में गए और एक दूसरे को साफ किया. फिर बाहर आकर कपड़े पहने और खाना ऑर्डर किया. खाना खाने के बाद हम थोड़ी देर बाहर घूमने चले गए और रात के 11 बजे वापस अपने रूम में आए.
फिर एक राउंड और खेला और मैंने भाभी को डॉगी स्टाइल में चोदा.

फिर दो दिन हमने बहुत चुदाई की और मैंने भाभी को अलग अलग स्टाइल में चोदा.
वो बहुत खुश थीं, उन्होंने कहा- बहुत टाइम बाद मैंने इतनी चुदाई की है.

उसके बाद हम घर आ गए और जब भी मौका मिलता मैं उनके घर जा कर भाभी की चुदाई करता रहा. करीब 6 महीने बाद उनके पति का ट्रान्सफर हो गया और वो चली गईं. आज भी उनसे फोन पर बात होती है, पर उनसे मिलने का दोबारा मौका नहीं मिला.

आपको भाभी की चुदाई की कहानी कैसी लगी.. मुझे मेल करें.


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