विनीता का मुख और गांड का चोदन-1


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(Vinita Ka Mukh Aur Gand Chodan- Part 1)

हाय दोस्तो,
अपनी पिछली हिंदी चोदन कहानी
विनीता की अकड़ और चुत दोनों ढीली की
में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने विनीता को चोदने में सफलता पायी।

विनीता मेरी एक अन्य दोस्त की सहेली है. वो जयपुर में एक एनजीओ में टॉप की अधिकारी है. उसकी उम्र लगभग 30 साल की है. वो एक बहुत कड़क स्वभाव की अफसर है. लेकिन देखने में बेहद मस्त है. उसका अपने पति से अलगाव हो चुका है. उसकी फिगर कातिलाना है. लम्बा कद, रंग गोरा, मस्त चूचियाँ और सेक्सी चूतड़, जिन्हें देखते ही उसकी गांड मारने की इच्छा जागृत हो जाए.

अब आगे पढ़िये कि कैसे विनीता के बाकी दोनों छेदों की मरम्मत किया।
मैंने रात भर विनीता को खूब चोदा, उसके अंग-अंग का भरपूर मजा लिया। मैंने उसे चार पाँच बार चोदा और हर बार मिशनरी स्टाइल में ही चोदा क्योंकि मैं आज उससे अंग से अंग से रगड़ कर उसे अपने शरीर पर अपने शरीर की रगड़ का अहसास दिलाना चाहता था ताकि उसके जिस्म पर मेरे जिस्म का हमेशा अहसास बना रहे।
एक बार चोदने के कुछ देर बाद मैं उसे फिर सहलाना और गर्म करना शुरू कर देता था और उसके ऊपर चढ़ कर सवारी गाठना शुरू कर देता था। बेचारी रात भर अपनी गांड हिला हिला कर चुदती रही और मैं उसे गर्वोन्नत भाव से चोदता रहा।
भरपूर चुदाई के बाद हम दोनों लगभग सुबह सो गये।

चुदाई के बाद वाली गहरी नींद के बाद जब मेरी आँखें खुली तो मैंने कमरे में खुद को अकेला पाया। मैंने घड़ी देखी तो दिन के 11.15 बज चुके थे, मैं पूरी तरह नंगा था, मैंने पहले भरपूर अंगड़ाई ली और अपना नंगापन ढका।
रात की हंगामेदार चुदाई याद कर मेरे चेहरे पर कुटिल मुस्कान आयी और मैंने विनीता की तलाश में निगाहें दौड़ानी शुरू की। तभी मेरे कानों में बाथरूम से कुछ आवाज आयी। मैं समझ गया कि विनीता बाथरूम में है। यूँ मैं उसे रात भर चोद चुका था लेकिन फिर उसके गदराये हुए नंगे बदन की कल्पना ने मुझे उत्तेजित कर दिया और मैं बाथरूम के दरवाजे पर निगाहें गड़ाए हुए मुठ मारने लगा।

रात भर की कई राउण्ड चुदाई के चलते मेरा माल निकलने में समय लगा। उधर विनीता भी काफी देर से अंदर थी, आप जानते ही हैं कि महिलाएं बाथरूम में कितनी देर लगाती हैं।
मैं फिर से बेड पर लेट गया और विनीता के साथ आगे कैसे और क्या करना है, इसकी प्लानिंग करने लगा।

थोड़ी देर बाद बाथरूम का दरवाजा खुला और काली ब्रा-पैंटी में विनीता प्रकट हुई। वो समझ रही थी कि मैं सो रहा हूँ। लेकिन जब उसने मुझे जगा हुआ पाया तो तुरन्त फिर बाथरूम में घुस गई। मैंने मन ही मन मुस्काते हुए सोचा साली रात भर मुझसे चिपक कर चुदवाती रही और अब शर्मा रही है। लेकिन मैं जानता था कि ये सब मेरी दवा का कमाल है। लेकिन विनीता इस वजह से झेंप रही थी कि कैसे वो मेरे सामने कमजोर पड़ कर समर्पण कर बैठी. नतीजन रात भर उसकी भरपूर चुदाई हो गयी।

मैंने सोचा ‘शर्मा लो डार्लिंग कुछ समय के लिए… फिर तो तुम्हें ऐसा बेशर्म बनाउंगा कि तुम मेरे सामने नंगी ही रहोगी।’

खैर विनीता बाथरूम में घुस तो गई लेकिन उसका गाउन बाहर ही था लिहाजा उसे मजबूरन उसी हालत में फिर बाहर आना पड़ा, उसने बाहर आ कर नीची निगाहें किए हुए अपना गाउन पहना।
मैंने उसे गुड मार्निंग कहा।
उसने धीमी आवाज में गुड मार्निंग बोला, फिर हिम्मत कर अपनी आँखें उठाई और मेरी तरफ देखते हुए बोली- तुम भी फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं चाय बनाती हूँ।
यह कह कर वो बेडरूम से बाहर निकल गई।

मैं आराम से फ्रेश हो कर बाहर निकला और अपने कपड़े पहने। इस समय मेरा शरीर चुदाई और उसके बाद की गहरी नींद के बाद फ्रेश होने से बहुत हल्का लग रहा था।

तभी विनीता चाय ले कर आ गई, उसके चेहरे पर अभी भी झेंप के निशान थे।
हम दोनों ने चाय पीनी शुरू की, बिना कुछ बोले चुपचाप पूरी चाय पी ली। मैंने ही पहल की और बेड पर विनीता के पास आ कर बैठ गया। मैंने विनीता के गले में बाँहें डाल कर उसे अपने थोड़ा करीब किया और उसके गालों पर हल्के से चूमते हुए उससे पूछा- रात को मजा आया?
वो कुछ नहीं बोली।

मैंने उसके नाजुक प्वाइंट कान के नीचे अपनी जीभ घुमाते हुए फिर कहा- बोलो ना डियर?
उसने फिर ‘हूँ’ कहा।
मैंने अपनी बाँहों को और कसते हुए उसका चेहरा अपनी तरफ घुमाया और बोला- शर्मा क्यों रही हो डार्लिंग?
और वह कुछ बोले, इसके पहले ही मैंने उसको स्मूच करना शुरू कर दिया।

भरपूर चुम्बन के बाद मैंने उसके कानों में रोमांटिक ढंग से कहा- आई लव यू डार्लिंग।
उसने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया और अपनी बाँहें मेरे गले में डालते हुए अपनी आँखें बंद कर ली।
मैं बहुत खुश हुआ क्योंकि अब वह अपनी भावना के वशीभूत हो कर ऐसा कर रही थी न कि दवा के असर से। मैं समझ गया किया कि अब यह साली कंट्रोल में आ गयी है।

मैं धीरे धीरे उसके मखमली जिस्म को सहलाता रहा और वो भी मेरी इस हरकत का मजा लने लगी। थोड़ी देर बाद मैं उसे अपनी बाँहों में लेकर बेड पर लेट गया। पहले तो मैंने उसका एक गहरा चुम्बन लिया फिर उसकी मस्त गांड को सहलाते हुए उससे रोमांटिक बातें करनी शुरू कर दी।
विनीता भी थोड़ी देर की हिचकिचाहट के बाद बातें करने लगी।

मैं उसे जानबूझ कर सेक्स की ही बातें कर रहा था। मैंने उससे पूछा कि क्या उसने पोर्न फिल्म देखी है तो उसने मना कर दिया।
मैंने उससे पूछा- क्या तुम देखना चाहोगी क्सक्सक्स फिल्म?
उसने कुछ नहीं बोला।
मैं समझ गया कि वो देखना चाहती है लेकिन कहने में शर्मा रही है।

मैं उसे पोर्न मूवी इसलिए दिखाना चाहता था क्योंकि इन फिल्मों में दिखाया जाने वाला लंड चूसने और गांड मरवाने के दृश्य देखकर वह इसे सामान्य समझे और ऐसा करने को मना न करे। दूसरे शब्दों में मैं उसे ब्लू फिल्में दिखाकर लंड चूसने और गांड मरवाने के लिए प्रोत्साहित कर सकूं।

मैंने उसे दीवाल से टेक लगा कर बैठा दिया और खुद भी उससे चिपक कर बैठ गया। मैंने अब अपनी मोबाइल खोली और उसे ब्लू फिल्म दिखाने लगा। जब फिल्म में लंड चूसने और गांड मारने के सीन आते तो मैं विनीता के कानों में फुसफुसाता- देख रही हो डार्लिंग, हम भी ऐसा ही करेंगे, तुम्हें बड़ा मजा आएगा।
विनीता चूपचाप ब्लू फिल्म देखती रही। एक तो ब्लू फिल्म के गर्म दृश्य और दूसरा तरफ मेरे कामुकता भरे अंदाज में उसके शरीर से खेलते हाथ। विनीता अब गर्म होने लगी और उसके मुहँ से गर्म भांप सी निकलने लगी.

मैं समझ गया कि अब साली चुदासी हो गयी है, मैंने उसके गाउन को शरीर से अलग कर दिया, अब वह केवल ब्रा पैंटी में थी। मैंने उसके मस्त चूतड़ों को सहलाना शुरू कर दिया और बीच बीच में हल्की चपत भी लगाने लगा।
हालाँकि मन तो उसकी मस्त गांड पर भरपूर तमाचे मार कर लाल कर देने का था लेकिन अभी इतना ही काफी था। उसकी चिकनी गांड का मजा लेने के बाद मैंने उसे लिटा दिया और उसकी ब्रा और पैंटी को निकाल फेंका, उसकी सेक्सी गांड के नीचे एक तकिया लगाया जिससे उसकी चूत उभर गयी, विनीता आँखें बंद किये हुए मजा ले रही थी।

फिर मैं अपने भी सारे कपड़े उतार कर जन्मजात अवस्था में आ गया। मैंने उसके तलवों से लेकर जाँघों तक चूमना और चाटना शुरू कर दिया। साली की चिकनी जांघों से खेलना बेहद सेक्सी अनुभव था। फिर मैनें उसकी बगल में आ कर लेट गया और उसकी एक चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरी चूची को मसलने लगा।

उत्तेजना के चलते विनीता की सांसें तेजी से चलने लगी और उसकी चूचियां ऊपर नीचे होने लगी। उसके होठों से गर्म सांसें निकलने लगीं. मैं उसकी इस हालत का मजा लेता रहा और फिर नीचे आ कर उसके गीली हो रही चूत पर अपने होंठ रख कर अपने जीभ का कमाल दिखाने लगा।
कुछ देर बाद मैंने अपनी उंगली विनीता की चूत में पेल दिया और अंदर बाहर करने लगा। विनीता अपनी गांड उछालने लगी और पहली बार उसके मुँह से निकला- फक मी रोहित! फक मी!

मैं समझ गया कि अब यह साली बुरी तरह गर्म हो गई है, इस हालत में इससे कुछ भी कराया जा सकता है। मैं विनीता के सर के पास बैठ गया, मैंने उससे अपनी आँखें खोलने को कहा। उसने अपनी आँखें खोली और अपने होठों के सामने मेरा मस्त लंड पाया। उसने अपनी निगाहें उठा कर मेरी ओर देखा, मैंने उसे लंड को चूमने का इशारा किया।
वह शान्त रही।

फिर मैंने उसके होठों में अपने हाथ की एक उंगली डाल दी, वह उसे आँखें बंद करके चूसने लगी। एकाध मिनट बाद मैंने उसके मुँह से उंगली निकाली और और अपना उसके मुँह को खोलते हुए अपना लंड उसके मुँह में पेल दिया। उसने घबरा कर अपनी आँखें खोली और लंड को बाहर करने लगी लेकिन मैंने उसके मुँह को मजबूती से पकड़ कर उसकी एक न चलने दी और उससे कहा- चूसो मेरी जान, अभी तुम्हें बहुत मजा आएगा।

वह मेरे लंड को मजबूरी में अपने मुँह में लिए चुपचाप पड़ी रही। तब मैंने सोचा कि मुझे ही कुछ करना होगा। मैंने अपना लंड विनीता के मुँह में आगे पीछे करना शुरू कर दिया, उसका मुख चोदन करने लगा. लेकिन ध्यान रखा कि लंड पूरी तरह उसके मुँह से बाहर न आए। कुछ देर तक मैं विनीता का मुख चोदन करता रहा, साथ ही उसकी चूची भी मसलता और दबाता रहा ताकि उसकी उत्तेजना कम न हो। थोड़ी देर बाद विनीता ने अपने होठों से मेरे लंड को कस लिया, मेरा लंड को आगे-पीछे करने पर ब्रेक लग गया।

मैंने विनीता के चेहरे की ओर देखा, विनीता ने अपनी आँखों को मेरी आँखों में देखते हुए खुद अपना मुँह आगे पीछे करना शुरू कर दिया, मैं समझ गया कि साली अब लाइन पर आ गयी है। मैंने उसे बिठा दिया और उसके सामने अपना खड़ा लंड ले कर बैठ गया जो उसके थूक से गीला हो गया था। मैंने उसका चेहरा पकड़ कर उसे अपने लंड पर झुकाया। उसने पहले तो मेरे लंड पर लगे अपने थूक को चाट कर साफ किया फिर मुँह में ले कर अंदर बाहर करने लगी।

मैंने उससे कहा- वाह डार्लिंग! बहुत जल्दी एक्सपर्ट हो गयी।
उसने कुछ नहीं कहा और मेरे लंड का मजा लेती रही।

कुछ देर बाद मुझे लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने उसका चेहर पकड़ कर उठाया, उसे लगा जैसे उसकी कोई प्रिय चीज छीन ली गयी हो। मैंने उसे बिस्तर से उठा कर फर्श पर घुटने के बल बिठाया और खुद बिस्तर पर एक तकिया के ऊपर बैठ गया और फिर विनीता को अपना लंड चूसने का इशारा किया।
इस बीच में मेरा झड़ने का समय थोड़ा बढ़ गया। हमेशा मर्दों को अपनी जूती के तले रखने वाली विनीता अपने घुटने पर बैठ कर मेरा लंड चूस रही थी।
यह देखना बड़ा मजेदार था।

कुछ देर बाद मेरे झड़ने का समय फिर आ गया, अब मैंने विनीता की गर्दन पर अपने हाथों का दबाव बनाया ताकि वो मेरा लंड अपने मुँह से बाहर न निकाल सके। जब मुझे लगा कि अब मेरा माल निकलने वाला है तो मैंने अपना लंड विनीता के हलक तक पहुँचा दिया और पूरा लंडामृत सीधे उसके गले में उतार दिया। उसे चाहते न चाहते मेरा लंडामृत पीना पड़ा। मैंने उसके चूतामृत पीने का उधार चुकता कर दिया।

अपना लंडामृत पिलाने के बाद मैंने विनीता को अपना मुँह पानी से साफ करने को कहा।
विनीता उठी और अपनी गांड मटकाते हुए वाशरूम में घुस गयी औा पानी से अपने मुँह को खंगाल कर और अपनी चूत साफ कर आ गयी क्योंकि मेरा लंड चूसते चूसते वो खुद भी झड़ गयी थी। मैंने उसे अब एक माउथ फ्रेशनर खाने को दिया ताकि उसका चुम्बन लेते समय मुझे अपने माल की गंध न महसूस हो।

विनीता माउथ फ्रेशनर खाकर बेड पर बैठ गयी। उसके माउथ फ्रेशनर खा लेने के बाद मैंने उसे फिर खींच कर अपनी बाँहों में भर लिया और उसके रसीले होठों को अपने होठों की गिरफ्त में ले कर उसके यौवन का रसपान करने लगा। उसके सुगन्धित मुँह का स्वाद बहुत मस्त लग रहा था।

कुछ देर के बाद हमने एक दूसरे के थूक की अदला-बदली की और पी गये। इस गहरे चुम्बन से विनीता और मैं दोनों फिर गरम हो गये। अब मैं विनीता को लिए हुए करवट के बल बेड पर लेट गया, वो मेरी बायीं तरफ करवट लेकर लेट गयी और मैं भी उसे उसके पीछे से अपने आलिंगन में ले कर लेट गया।
मेरा लंड उसकी मस्त गांड से लगा हुआ था।

अब मैंने अपना लंड उसकी गांड के नीचे से ले जा कर उसकी चूत से स्पर्श किया, लंड का सुपारा अपनी चूत पर महसूस करते ही विनीता जैसे सिहर उठी और उसके मुँह से एक आह निकल गयी। मैंने अपना लंड आगे बढ़ाया। रात भर में कई राउण्ड चुदने से अब उसकी चूत में मेरा लंड अपेक्षाकृत आसानी से आगे बढ़ गया।

इस बीच मैं विनीता का चेहरा घुमा कर उसके होठों पर हल्की हल्की चुम्मियाँ लेता रहा। धीरे धीरे कर मैंने अपना पूरा लंड विनीता की चूत में जड़ तक पेवस्त कर दिया। पूरा लंड पेलने के बाद मैंने विनीता का एक गहरा चुम्बन लिया और उसे पेलना शुरू किया। बीच बीच में मैं उसके चुम्बन लेता और उससे पूछता कि मजा आ रहा है न मेरी जान?
वो चुदाई में इतनी मदहोश थी कि क्या बोलती… बस हाँ-हूँ करती… मैं उसकी गदरायी जवानी का मजा लेता हुआ उसे पेलता रहा।

लगभग बीस मिनट की जोरदार चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में झड़ गया। इस बीच में वो भी दो तीन बार झड़ी। मैंने उसकी चूत में लंड डाले हुए उसको अपने नीचे कर लिया और खुद उसके ऊपर मिशनरी स्टाइल में आ गया।
विनीता मुझसे बेल की भाँति लिपटी हुई हाँफ रही थी। मेरा लंड अब सामान्य हो चुका था लेकिन अभी विनीता की चूत में ही था।

मैंने एक और मजा लेने का सोचा और विनीता की चूत में मूतने लगा। विनीता को कुछ समझ में ही नहीं आया कि क्या हो रहा है। उसने मुझे अपने ऊपर से हटाने की नाकाम कोशिश की क्योंकि मैंने उसे मजबूती से जकड़ रखा था।
विनीता की चूत में पूरी तरह मूतने के बाद मैं उसके ऊपर से हट गया। उसकी चूत मेरे मूत से भर चुकी थी और कुछ बाहर भी निकल रहा था। मैंने विनीता को अपनी गोद में उठाया और वाशरूम में ले गया और उसे मूतने को कहा।
वो झिझक रही थी लेकिन मेरे मूत से भरे चूत को खाली करने का प्रेशर भी था लिहाजा विनीता मेरे सामने ही मूतने लगी। मैं उसकी चूत से बाहर निकलता हुआ अपना मूत्र देखता रहा। मूतने के बाद वो उठी और फिर हम दोनों ने खुद को साफ किया और मैं विनीता का हाथ पकड़े हुए बेडरूम में आ गया।

हिंदी चोदन कहानी जारी रहेगी.


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